नीट-यूजी परीक्षा रद्द: छात्रों की चिंताओं के बीच एनटीए ने दी जिम्मेदारी
परीक्षा रद्द होने का निर्णय
3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को रद्द करने की घोषणा करते हुए एनटीए ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को पुनः पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी और न ही उन्हें कोई शुल्क देना होगा। सभी पंजीकरण जानकारी, उम्मीदवारों के विवरण और परीक्षा केंद्र पहले की तरह बने रहेंगे। इस परीक्षा के रद्द होने से लगभग 24 लाख छात्रों पर प्रभाव पड़ा है। एनएसयूआई और एसएफआई जैसे छात्र संगठनों ने विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन किए। बार-बार हो रही गलतियों के कारण विपक्ष के नेताओं ने एनटीए में सुधार की मांग की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा रद्द करने पर मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया, जबकि एनटीए ने इस स्थिति को छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा, 'हम जो हुआ उसकी जिम्मेदारी लेते हैं।' उन्होंने बताया कि पुनर्परीक्षा का नया कार्यक्रम अगले सात से दस दिनों में घोषित किया जाएगा।
पिछले विवाद और वर्तमान स्थिति
इससे पहले 2024 में नीट-यूजी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने और अनुग्रह अंकों में अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके चलते बिहार और गुजरात में विरोध प्रदर्शन हुए, सर्वोच्च न्यायालय में मामले दायर किए गए और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, न्यायालय ने राष्ट्रव्यापी पुनर्परीक्षा का आदेश नहीं दिया, लेकिन उसने यह माना कि कुछ मामलों में परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता हुआ है और जांच का कुछ हिस्सा बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और साक्ष्य नष्ट करने से संबंधित धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत इस मामले में एफआईआर दर्ज की। वर्तमान में जिन आरोपों की जांच की जा रही है, उनमें 'अनुमानित प्रश्न पत्र' और वास्तविक नीट-यूजी प्रश्न पत्र के बीच समानता शामिल है। राजस्थान के अधिकारियों ने दावा किया है कि लीक हुई सामग्री के कई प्रश्न परीक्षा पत्र से मेल खाते हैं।
छात्रों की भावनाएं और भविष्य की चुनौतियां
नीट-यूजी परीक्षा के रद्द होने से न केवल व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि लाखों छात्रों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है, जिससे देशभर में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। छात्र और उनके अभिभावक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। प्रश्न पत्रों के लीक होने से एनटीए और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।
यदि हम अतीत में देखें, तो डॉक्टरों से संबंधित ही नहीं, रेलवे और पुलिस भर्ती से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द हो चुकी हैं। सरकार को परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों की भावनाओं को गंभीरता से लेते हुए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर एक 'फूलप्रूफ' व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
मुख्य संपादक का संदेश
-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक
