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नुसरत भरूचा का महाकाल दर्शन: विश्वास और विवाद

अभिनेत्री नुसरत भरूचा के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन ने विवाद खड़ा कर दिया है। कुछ लोग उनके इस कदम को इस्लाम के खिलाफ मानते हैं। नुसरत ने अपने विश्वास और नमाज पढ़ने की आदतों के बारे में खुलकर बात की है। इस बीच, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके दर्शन को गुनाह बताया है। जानें इस पूरे मामले की गहराई में क्या है।
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नुसरत भरूचा का महाकाल दर्शन: विश्वास और विवाद

महाकालेश्वर के दर्शन पर विवाद

फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा इस समय श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन को लेकर चर्चा में हैं। उनके इस कदम को कुछ लोगों ने नकारात्मक रूप से लिया है। आलोचकों का कहना है कि जब नुसरत खुद को मुस्लिम मानती हैं, तो वे इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ जाकर महाकालेश्वर की भस्म आरती में कैसे शामिल हो सकती हैं। इसी बीच, नुसरत का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपने विश्वास और आस्था के बारे में बात कर रही हैं।


धर्म और विश्वास पर नुसरत का बयान

मुझे इस मार्ग पर चलना

वायरल वीडियो शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट का हिस्सा है, जिसमें नुसरत ने अपने धर्म और विश्वास पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनके लिए उनका विश्वास सच्चा है और यही उन्हें मजबूती प्रदान करता है। नुसरत ने कहा, 'इसीलिए मैं अब भी मजबूत और जुड़ी हुई हूं, और मैं जानती हूं कि मुझे इस मार्ग पर चलना है।'


नमाज और शांति की खोज

दिन में पांच बार नमाज

नुसरत ने आगे कहा, 'आपको जहां भी शांति मिलती है, वहां जाना चाहिए, चाहे वह मंदिर हो, गुरुद्वारा हो या चर्च। मैं खुलकर कहती हूं कि मैं नमाज पढ़ती हूं। अगर मुझे समय मिलता है, तो मैं दिन में पांच बार नमाज पढ़ती हूं। मैं यात्रा के दौरान भी अपनी नमाज की चटाई साथ रखती हूं। मुझे जहां भी शांति और सुकून मिलता है, मैं वहीं जाती हूं। मेरा मानना है कि ईश्वर एक है और उससे जुड़ने के कई रास्ते हैं, और मैं उन सभी रास्तों को खोजना चाहती हूं।'


मौलाना का बयान

बहुत बड़ा गुनाह

नुसरत भरूचा के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद, अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, 'शरिया कानून के अनुसार पूजा करना एक बहुत बड़ा गुनाह है। ये हरकतें इस्लाम के खिलाफ हैं। नुसरत को इसका पश्चाताप करना चाहिए।'