नेपाल के आगामी चुनाव: राजनीतिक स्थिरता और युवा नेतृत्व की चुनौतियाँ
नेपाल की राजनीतिक स्थिति
राजीव रंजन तिवारी | नेपाल की राजनीति वर्तमान में बहुदलीय संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य के ढांचे के तहत संचालित होती है, जहां अक्सर गठबंधन सरकारें बनती हैं और राजनीतिक स्थिरता की कमी रहती है। अब, सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार द्वारा पांच मार्च को आम चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। मई 2008 में संवैधानिक राजतंत्र समाप्त होने के बाद नेपाल गणतांत्रिक राज्य बना। यहां राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख और प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है। आमतौर पर किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, जिससे गठबंधन सरकारें बनती हैं। नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां प्रमुख दल हैं। केपी शर्मा ओली (यूएमएल) और शेर बहादुर देउबा (नेपाली कांग्रेस) मुख्य राजनीतिक चेहरे हैं। 2026 के चुनावों में युवा नेतृत्व और बालेन शाह जैसे नए चेहरों की चर्चा हो रही है। नेपाल की राजनीति में भारत और चीन का महत्वपूर्ण प्रभाव है। ओली और प्रचंड को अक्सर चीन समर्थक माना जाता है, जबकि भारत अपनी सुरक्षा के लिहाज से नजरें रखता है।
चुनाव की तैयारी
नेपाल की हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए लगभग 19 मिलियन लोग वोटिंग में हिस्सा लेंगे, जो देश के दो हाउस ऑफ़ पार्लियामेंट में से निचला हाउस है। नेपाल के लोग पांच मार्च को नई सरकार चुनने के लिए वोट डालेंगे। सितंबर 2025 में युवाओं के नेतृत्व वाले एंटी-करप्शन प्रोटेस्ट के बाद से यह देश का पहला आम चुनाव होगा, जिसने सरकार गिरा दी थी। तब से सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली एक अंतरिम सरकार चल रही है, जिसने नए चुनाव कराने और सत्ता सौंपने का वादा किया था। मतदान के दौरान लगभग 19 मिलियन लोग वोटिंग करेंगे, जिनमें 800,000 पहली बार वोट देने वाले शामिल हैं। वे फर्स्ट पास्ट द पोस्ट और प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन के मिश्रण से 275 पार्लियामेंट मेंबर चुनेंगे।
चुनाव प्रणाली
नेपाल में मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम है जिसे 2015 के संविधान में लागू किया गया था। पहले सिस्टम को फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (एफपीटीपी) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि जो सबसे ज्यादा वोट जीतता है, वह सीट जीत जाता है। दूसरे को प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (पीआर) कहा जाता है, जो किसी राजनीतिक पार्टी को मिले वोटों के अनुपात को ध्यान में रखता है। कुल 165 सीटें एफपीटीपी सिस्टम से भरी जाएंगी, जबकि बाकी 110 सीटों पर पीआर के जरिए चुनाव होगा।
राजनीतिक दलों की स्थिति
नेपाली कांग्रेस, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की जगह 49 साल के गगन थापा को अपना नेता चुना है, एक और मजबूत दावेदार है। दूसरी मुख्य पार्टी ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूएमएल) है, जिसने पिछले चुनाव में सबसे ज़्यादा सीटें जीती थीं। झापा 5, जो नेपाल के पूर्वी झापा इलाके की पांच पार्लियामेंट्री सीटों में से एक है, पूर्व पीएम केपी ओली का पारंपरिक गढ़ है। लेकिन इस बार काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
जनता की अपेक्षाएँ
पिछले सितंबर के प्रदर्शनों के दौरान 77 लोग मारे गए थे, जिनमें से कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गोली मारी थी। ये विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर बैन की वजह से शुरू हुए थे, लेकिन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आर्थिक मंदी के खिलाफ़ गुस्से ने इसे और भड़का दिया। मौजूदा चुनाव के मद्देनजर ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों ने अपने मेनिफेस्टो में बेहतर शासन, भ्रष्टाचार से लड़ने और रोजगार कम करने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है।
भारत की दृष्टि
नेपाल के चुनाव पर भारत की नजर है। चूंकि भारत के कई राज्यों की सीमाएं नेपाल से सटी हैं, इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर चौकसी बरती जा रही है। भारत वहां एक स्थिर सरकार चाहता है जो चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करे और सीमा विवादों को कूटनीतिक बातचीत से सुलझाए।
