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नेपाल में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर सियासी हलचल, विपक्ष ने पीएम बालेन शाह पर दबाव डाला

भारत और चीन ने 2026 के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे नेपाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर दबाव डाला है कि वह भारत और चीन के साथ उच्च स्तरीय बातचीत करे। नेपाल ने लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर अपने दावे को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।
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नेपाल में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर सियासी हलचल, विपक्ष ने पीएम बालेन शाह पर दबाव डाला

काठमांडू में सियासी हलचल

काठमांडू: भारत और चीन ने 2026 के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को पुनः आरंभ करने का निर्णय लिया है, जिससे नेपाल में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी के मुद्दे पर नेपाल में फिर से विवाद उठ खड़ा हुआ है। नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष अब सरकार से यह मांग कर रहा है कि वह केवल 'डिप्लोमैटिक नोट' भेजने तक सीमित न रहे, बल्कि इन क्षेत्रों पर भारत और चीन के साथ उच्च स्तरीय बातचीत करे। नेपाल ने हमेशा इन भारतीय क्षेत्रों पर अपने बेबुनियाद दावे पेश किए हैं, जिन्हें भारत ने हर बार खारिज किया है।


कैलाश मानसरोवर यात्रा का विवाद

भारत और चीन ने जून से अगस्त 2026 के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस यात्रा के लिए उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला रूट का उपयोग किया जाएगा। नेपाल सरकार को लिपुलेख मार्ग के उपयोग पर कड़ी आपत्ति है। नेपाल का कहना है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी उसके हिस्से में आते हैं। हाल ही में, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत और चीन को इस यात्रा के विरोध में अलग-अलग कूटनीतिक पत्र भेजे हैं। नेपाल का तर्क है कि उसकी सहमति के बिना इस क्षेत्र में कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए।


नेपाली विपक्ष का पीएम बालेन शाह पर हमला

नेपाली संसद के निचले सदन की अंतरराष्ट्रीय संबंध और पर्यटन समिति की बैठक में इस मुद्दे पर हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने पीएम बालेन शाह की सरकार पर तीखा हमला किया। नेपाली कांग्रेस के सांसद संदीप राणा ने विवादित बयान देते हुए कहा कि लिपुलेख उनकी जमीन है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह अब दोनों पड़ोसियों के साथ 'टेबल टॉक' करने में देरी न करे। वहीं, सीपीएन (यूएमएल) की सांसद भूमिका लिंबू सुब्बा ने भारत की प्रतिक्रिया को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया, जबकि माओवादी सेंटर के सांसद प्रमेश कुमार हमाल ने इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक ताकतों को एकजुट करने की अपील की है।


भारत का स्पष्ट और कड़ा जवाब

नेपाल के इन दावों पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल की आपत्तियों को खारिज करते हुए इसे 'एकतरफा और कृत्रिम विस्तार' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग का उपयोग 1954 से किया जा रहा है और इसमें कुछ भी नया नहीं है। भारत ने कहा है कि यदि कोई सीमा विवाद है, तो नई दिल्ली हमेशा बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन एकतरफा दावे करना किसी भी समस्या को हल करने का सही तरीका नहीं है।