Newzfatafatlogo

नोएडा का नया एयरपोर्ट: क्या बदलेंगे दिल्ली-NCR के हवाई सफर के नियम?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का उद्घाटन किया है, जो दिल्ली-NCR के हवाई परिवहन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की उम्मीद है। इस नए एयरपोर्ट के खुलने से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे, लेकिन एयरलाइंस कंपनियों को ईंधन टैक्स के अंतर के कारण नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जानें, क्या यात्रियों को सस्ती उड़ानों का लाभ मिलेगा और दिल्ली एयरपोर्ट पर इसका क्या असर होगा।
 | 
नोएडा का नया एयरपोर्ट: क्या बदलेंगे दिल्ली-NCR के हवाई सफर के नियम?

प्रधानमंत्री मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया


भारत को एक और उन्नत एयर कनेक्टिविटी का उपहार मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, जिसे जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, का उद्घाटन किया है। इस नए एयरपोर्ट के खुलने से यात्रियों को सुविधाएं मिलेगी और दिल्ली-NCR के हवाई परिवहन नेटवर्क में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, जहां आम जनता में खुशी है, वहीं एयरलाइंस कंपनियों के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई हैं।


जेवर एयरपोर्ट की स्थिति

ग्रेटर नोएडा में स्थित यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 72 किलोमीटर की दूरी पर है। अब तक, दिल्ली एयरपोर्ट इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र था, लेकिन जेवर एयरपोर्ट के चालू होने से यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और भीड़भाड़ में कमी आ सकती है।


एयरलाइंस की चिंताएँ

एयरलाइंस की चिंता की असली वजह


एयरलाइंस कंपनियों की समस्याओं का मुख्य कारण दोनों राज्यों में एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाला टैक्स है। दिल्ली में इस पर लगभग 25% VAT लगाया जाता है, जिससे इसकी लागत बढ़ जाती है। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह टैक्स काफी कम है, जिससे फ्यूल की कीमतें सस्ती होती हैं।


इस अंतर का सीधा प्रभाव एयरलाइंस के खर्च पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली से मुंबई जाने वाली एक सामान्य उड़ान में लगभग 4 टन फ्यूल की आवश्यकता होती है। यदि यह फ्यूल दिल्ली में भरा जाए, तो कंपनियों को प्रति उड़ान लगभग 96,000 रुपये अधिक खर्च करने पड़ सकते हैं, जबकि यूपी में यह खर्च काफी कम होता है।


यात्रियों के लिए संभावित लाभ

यात्रियों के लिए सस्ती उड़ानों की उम्मीद


फ्यूल की सस्ती कीमत का लाभ यात्रियों तक भी पहुँच सकता है। यदि एयरलाइंस की लागत कम होती है, तो वे किराए में भी कमी कर सकती हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी एयरलाइन ने टिकट की कीमतों में कमी का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों राज्यों के बीच टैक्स का अंतर बना रहता है, तो इसका सीधा असर दिल्ली एयरपोर्ट के यातायात पर पड़ेगा। भविष्य में यदि सरकारें टैक्स संरचना में बदलाव करती हैं, तो स्थिति में बदलाव संभव है।