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नोएडा जिला अस्पताल में 60,000 पशु सिरिंज का विवाद: स्वास्थ्य मंत्री पर उठे सवाल

नोएडा के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में एक गंभीर चूक सामने आई है, जहां 60,000 पशु सिरिंज का ऑर्डर दिया गया। यह मामला तब उजागर हुआ जब सप्लाई के बाद सिरिंज की पहचान की गई। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। जानें इस लापरवाही के पीछे की कहानी और अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या रही।
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नोएडा जिला अस्पताल में 60,000 पशु सिरिंज का विवाद: स्वास्थ्य मंत्री पर उठे सवाल

नोएडा अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही


नोएडा। नोएडा के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं में एक गंभीर चूक सामने आई है। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के लिए 60,000 पशु सिरिंज का ऑर्डर दिया, जो कि जानवरों के लिए उपयोग की जाती हैं। फार्मासिस्ट से लेकर सीएमएस तक की फाइल चेकिंग के बावजूद यह गलती नहीं पकड़ी गई। यह जानकारी जेम पोर्टल के माध्यम से हुई ऑर्डर और सप्लाई के बाद सामने आई है।


नोएडा जिला अस्पताल में 60,000 पशु सिरिंज का विवाद: स्वास्थ्य मंत्री पर उठे सवाल


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर ट्वीट किया कि यदि स्वास्थ्य मंत्रालय को एक सुई लगाई जाए, तो शायद उनकी तबियत ठीक हो जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा इंसान को इंसान नहीं समझती, इसलिए नोएडा के अस्पताल में जानवरों की सिरिंज मंगाई गई। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री की छुट्टी पर होने की बात भी उठाई और इस लापरवाही की गहन जांच की मांग की।


ऑर्डर में हुई चूक

यह लापरवाही इस हद तक बढ़ गई कि ऑर्डर तीन स्तरों के अधिकारियों की निगरानी से गुजरने के बावजूद किसी ने भी इसे नहीं पहचाना। जानकारी के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 को नोएडा जिला अस्पताल ने जीकेएम/जेम पोर्टल के माध्यम से 60,000 वेटरनरी सिरिंज का ऑर्डर दिया। लगभग एक महीने बाद जब सप्लाई आई, तो स्टोर रूम में बॉक्स खोलने पर यह स्पष्ट हुआ कि ये सिरिंज इंसानों के लिए नहीं, बल्कि पशुओं के लिए हैं। इस चौंकाने वाली गलती ने अस्पताल प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर किया।


तीन स्तरों की निगरानी में चूक

अस्पताल में दवाइयों और उपकरणों की मांग फार्मासिस्ट से शुरू होकर एसएमओ स्टोर और फिर सीएमएस तक जाती है। इस प्रक्रिया में तीन बड़े अधिकारियों की मेज से फाइल गुज़री, लेकिन किसी ने यह नहीं देखा कि ऑर्डर इंसानों के लिए है या जानवरों के लिए।


सीएमएस डॉ. अजय राणा ने कहा कि यह गलती एजेंसी की है और उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। यदि स्टाफ की गलती होगी तो उसकी भी जांच की जाएगी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि जब ऑर्डर अस्पताल से जारी हुआ और सिस्टम में दर्ज हुआ, तो पूरी जिम्मेदारी केवल एजेंसी पर कैसे आ सकती है?


सप्लाई रद्द और कार्रवाई

जेम ऐप पर भेजे गए ऑर्डर में स्पष्ट लिखा गया था कि यह वेटरनरी सिरिंज है। मामले के उजागर होने के बाद अस्पताल ने सप्लाई को रद्द कर दिया और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इस बड़ी फजीहत को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और अधिकारी अभी तक खुलकर जवाब नहीं दे रहे हैं।


घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण

25 दिसंबर 2025 को जिला अस्पताल ने जेम/जीकेएम पोर्टल के माध्यम से 60,000 वेटरनरी सिरिंज का ऑर्डर भेजा। सप्लाई लगभग एक महीने बाद अस्पताल पहुंची। स्टोर रूम में बॉक्स खोलने पर स्पष्ट रूप से ‘पशु चिकित्सा उपयोग के लिए’ लिखा पाया गया। मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऑर्डर को रद्द कर दिया और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी की।