नोएडा पुलिस ने मोबाइल चोरी के अंतरराज्यीय गिरोह का किया भंडाफोड़, 821 महंगे फोन बरामद
नोएडा में मोबाइल चोरी के गिरोह का पर्दाफाश
नोएडाः नोएडा पुलिस ने एक संगठित और अंतरराज्यीय मोबाइल चोरी गिरोह का खुलासा करते हुए महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से मोबाइल फोन चुराने वाले गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस ने इन आरोपियों से कुल 821 महंगे स्मार्टफोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग छह से आठ करोड़ रुपये है।
भीड़भाड़ वाले स्थानों को बनाते थे निशाना
जांच में यह सामने आया है कि यह गिरोह विशेष रूप से उन स्थानों को निशाना बनाता था, जहां लोगों की भीड़ अधिक होती है। मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, साप्ताहिक बाजार और मेलों जैसे स्थान इनके लिए आसान लक्ष्य होते थे। आरोपी बड़ी चतुराई से लोगों की जेब या बैग से मोबाइल निकाल लेते थे, और पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगती थी।
गिरोह की शातिर कार्यप्रणाली
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह की कार्यप्रणाली अत्यंत चालाक थी। आरोपी हर तीन महीने में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न इलाकों में किराए पर मकान लेते थे और वहीं रहकर चोरी के मोबाइल इकट्ठा करते थे। तय समय पूरा होते ही वे स्थान छोड़कर अपने गृह राज्य लौट जाते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें और कोई स्थायी सुराग न मिले।
NCR से नेपाल तक फैला नेटवर्क
सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शक्ति अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह बिहार और झारखंड से 2-3 महीने के लिए दिल्ली-एनसीआर आता था। यहां बड़ी संख्या में मोबाइल चोरी करने के बाद इन्हें ट्रेन के माध्यम से बिहार और झारखंड ले जाया जाता था। वहां से मोबाइल नेपाल भेजे जाते थे, जहां इन्हें बहुत कम दामों पर बेचा जाता था।
गिरोह में जिम्मेदारियों का बंटवारा
पुलिस जांच में पता चला है कि इस गैंग के हर सदस्य की भूमिका अलग-अलग थी। कुछ लोग सीधे भीड़ में मोबाइल चोरी करते थे, जबकि अन्य चोरी के मोबाइल इकट्ठा करने और छिपाने का काम करते थे। दो नाबालिग आरोपी भीड़ और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखते थे और पुलिस की मौजूदगी की सूचना तुरंत देते थे। वहीं, गिरोह के वरिष्ठ सदस्य चोरी के मोबाइल को बाहर भेजने की व्यवस्था करते थे।
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों के निवासियों के रूप में हुई है। इनमें झारखंड के साहिबगंज और बिहार के भागलपुर व मधुबनी जिले के लोग शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले भी किसी मामले में शामिल रहे हैं या नहीं।
मोबाइल फोन के असली मालिकों तक पहुंचाने की चुनौती
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बरामद किए गए 821 मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाना है। इसके लिए IMEI नंबर के माध्यम से डेटा खंगाला जा रहा है और विभिन्न थानों में दर्ज मोबाइल चोरी की शिकायतों से मिलान किया जा रहा है। डीसीपी ने बताया कि पूछताछ में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह और भी बड़े स्तर पर सक्रिय हो सकता है।
