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नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद प्रशासन ने उठाए सख्त कदम

नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद, जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों को चार जोन में विभाजित किया है। प्रत्येक जोन में एक जोनल मजिस्ट्रेट और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य शांति बनाए रखना और भविष्य में किसी भी विवाद से निपटना है। जानें इस व्यवस्था के बारे में और अधिक जानकारी।
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नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद प्रशासन ने उठाए सख्त कदम

नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद प्रशासन की कार्रवाई


नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद प्रशासन की सख्त कार्रवाई। हाल ही में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन के बाद, नोएडा का जिला प्रशासन कानून-व्यवस्था को बनाए रखने और उद्योगपतियों तथा श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। प्रशासन ने सेक्टर-1 से 69 तक के सभी औद्योगिक क्षेत्रों को चार जोन में विभाजित किया है। प्रत्येक जोन में एक जोनल मजिस्ट्रेट और उनके अधीन सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं, जिनका कार्य शांति व्यवस्था बनाए रखना और आपसी तालमेल सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।


आदेश के अनुसार, मुख्य विकास अधिकारी शिवाकांत द्विवेदी, नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी डीपी सिंह, अपर जिलाधिकारी बच्चू सिंह और ओएसडी अभिषेक पाठक को जोनल मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। इनके अधीन कुल 19 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। शिवाकांत द्विवेदी के नेतृत्व में सेक्टर-1 से 6 तक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके साथ डिप्टी कलेक्टर वेद प्रकाश पांडे, पुष्पा यादव, जीएम प्लानिंग मीना भार्गव और जीएम जल आरपी सिंह को सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाया गया है।


इसी तरह, डीपी सिंह के जोन में सेक्टर-7 से 16 तक की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ अरविंद कुमार (ओएसडी), ए.के. अरोड़ा (जीएम), एसपी सिंह और अरविंद कुमार पाठक (डिप्टी कमिश्नर) को सेक्टर मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। अपर जिलाधिकारी बच्चू सिंह के जोन में चारुल यादव (उप जिलाधिकारी), रामानुज मिश्रा (डिप्टी कमिश्नर), वेद प्रकाश, जय प्रकाश शुक्ल और हेमकांत सिंह को सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाया गया है, जिन्हें सेक्टर-63 से 65 तक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, अभिषेक पाठक के नेतृत्व वाले जोन में सेक्टर-57 से 69 तक की जिम्मेदारी तय की गई है।


प्रशासन का कहना है कि इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या आंदोलन की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटना है।