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नोरा फतेही के गाने पर विवाद: सांसद रवि किशन ने उठाई आवाज़

नोरा फतेही के हालिया गाने 'सरके चुनरिया तेरी सरके' पर विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता नितिन नंदकर ने आरोप लगाया है कि गाने में अश्लीलता है। इस पर सांसद रवि किशन ने भी अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कंटेंट को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए जो सांस्कृतिक मूल्यों को ठेस पहुंचाता है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और क्या कदम उठाए गए हैं।
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नोरा फतेही के गाने पर विवाद: सांसद रवि किशन ने उठाई आवाज़

गाने पर उठे विवाद की पृष्ठभूमि

मुंबई। हाल ही में रिलीज़ हुए गाने 'सरके चुनरिया तेरी सरके' को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब आबिड्स पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि गाने में अश्लील और भद्दा कंटेंट है। यह शिकायत नितिन नंदकर द्वारा की गई, जो वीर शिवाजी सेना के अध्यक्ष और हैदराबाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष हैं। नंदकर ने अधिकारियों से इस मामले की जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस वीडियो को सभी सार्वजनिक प्लेटफार्मों से हटा दिया जाए।


नितिन नंदकर की शिकायत और पुलिस का आश्वासन

नितिन नंदकर ने कहा कि उनके संगठन ने फिल्म सर्टिफिकेशन संस्था सहित अन्य अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सेंसर बोर्ड से भी अपील की है कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएं। आज हमने आबिड्स पुलिस स्टेशन में यह मांग रखी और शिकायत भी दर्ज कराई। नंदकर के अनुसार, हैदराबाद पुलिस ने शिकायतकर्ताओं को आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जाएगी। यदि यह पाया गया कि इस कंटेंट का बच्चों और युवा दर्शकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने हमें आश्वासन दिया है कि यदि ऐसी घटनाओं का बच्चों और युवाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है, तो वे तुरंत कार्रवाई करेंगे और एफआईआर दर्ज करेंगे।


रवि किशन का विरोध

इस विवाद पर अभिनेता और लोकसभा सांसद रवि किशन ने भी अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। उन्होंने गाने के बोल में कथित अश्लीलता की कड़ी निंदा की। सांसद ने कहा कि समाज में ऐसे किसी भी कंटेंट को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, जो हमारी सांस्कृतिक मूल्यों को ठेस पहुंचाता हो। उन्होंने 'धुरंधर' जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये व्यावसायिक रूप से सफल फिल्में हैं, जो अश्लील कंटेंट पर निर्भर नहीं रहतीं। उन्होंने कहा कि कोई भी अश्लीलता जो संस्कृति और मूल्यों को ठेस पहुंचाती है, उसे बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। फिल्म निर्माताओं को 'धुरंधर' जैसी फिल्मों पर विचार करना चाहिए, जो बिना किसी अश्लीलता के भी सफल हो सकती हैं।