न्यू मैंगलोर पोर्ट का बर्थ नंबर 9 होगा आधुनिक, केंद्र ने दी मंजूरी
न्यू मैंगलोर पोर्ट का पुनर्विकास
केंद्र सरकार ने न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी (एनएमपीए) द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है, जिसके अंतर्गत न्यू मैंगलोर पोर्ट पर बर्थ नंबर 9 का पुनर्विकास किया जाएगा। यह कार्य पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत डीबीएफओटी आधार पर किया जाएगा। यह जानकारी सोमवार को साझा की गई।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना को 25 मार्च 2026 को मंजूरी मिली। यह कदम भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और समुद्री लॉजिस्टिक्स में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
इस परियोजना की लागत लगभग 438.29 करोड़ रुपए होगी, और इसे एक निजी कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा, जिसे ओपन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाएगा।
इस प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) निर्धारित की गई है। इसके अलावा, प्रोजेक्ट को संभालने वाली कंपनी को पांचवें वर्ष तक कम से कम 7.63 एमटीपीए कार्गो हैंडल करने की गारंटी देनी होगी। निर्माण कार्य पूरा होने में लगभग 2 साल का समय लगेगा, जबकि पूरे प्रोजेक्ट की अवधि 30 साल होगी।
इस योजना के तहत पुराने ढांचे को हटाकर बर्थ नंबर 9 को पूरी तरह से आधुनिक रूप में विकसित किया जाएगा। यहां कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद (पीओएल) और एलपीजी जैसे लिक्विड बल्क कार्गो को संभाला जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस आधुनिकीकरण के तहत बर्थ की गहराई (ड्राफ्ट) को मौजूदा 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर किया जाएगा, और भविष्य में इसे 19.8 मीटर तक बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है। इससे पोर्ट पर 2 लाख डीडब्ल्यूटी तक के बड़े जहाजों का आना-जाना संभव होगा, जिसमें वेरी लार्ज गैस कैरियर्स (वीएलजीसी) भी शामिल हैं।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से आधुनिक बनाने का एक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के माध्यम से पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को हटाकर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे पोर्ट की क्षमता में वृद्धि होगी और भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सकेगा।
करीब 50 साल पुराने ढांचे की जगह नई आधुनिक संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिनकी उम्र लगभग 50 साल तक होगी। इससे लंबे समय तक स्थिर और टिकाऊ संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
नई क्षमता के साथ यह पोर्ट क्षेत्र में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा। बड़े जहाजों की आवाजाही से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पोर्ट की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
