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पंचकुला में चार वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न: बस चालक को मिली 25 साल की सजा

पंचकुला की पॉक्सो अदालत ने चार वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में बस चालक को 25 साल की कठोर सजा सुनाई है। इस मामले में आरोपी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। घटना 2020 में हुई थी, जब बच्ची स्कूल बस में अकेली थी। मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के फैसले के पीछे की वजहें।
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पंचकुला में चार वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न: बस चालक को मिली 25 साल की सजा

पंचकुला में न्याय का फैसला


पंचकुला: पंचकुला की पॉक्सो अदालत ने एक दिल दहला देने वाले मामले में चार वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के दोषी स्कूल बस चालक को 25 साल की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने आरोपी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि वह जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।


घटना का विवरण

यह मामला 2020 का है, जब पिजौर क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाली चार वर्षीय बच्ची के साथ स्कूल बस में एक घिनौनी घटना हुई थी। पुलिस ने आरोपी बस चालक निरंजन उर्फ हनी को गिरफ्तार किया था। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी थी और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे।


बस में अकेले होने का फायदा उठाया

पीड़िता अपनी मौसी के पास पिंजौर में रहती थी और रोजाना स्कूल बस से स्कूल जाती थी। 14 फरवरी 2020 को, बस ने बच्ची को स्कूल के लिए उठाया। दोपहर में, बस सामान्य समय से लगभग 30 मिनट देरी से घर लौटी। शाम को बच्ची पेट में तेज दर्द से तड़पने लगी।


जब मौसी ने बार-बार पूछताछ की, तो बच्ची ने बताया कि स्कूल बस के ड्राइवर ने उसके साथ गलत हरकत की है। इस खुलासे ने परिवार को हिलाकर रख दिया और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया।


मेडिकल जांच से पुष्टि

बच्ची को तुरंत पंचकुला के सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की जांच में यह पुष्टि हुई कि बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया था। इसके बाद, पीड़िता की मौसी की शिकायत पर पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।


पुलिस ने आरोपी निरंजन उर्फ हनी को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया शुरू की। अदालत में पेश किए गए मेडिकल सबूत, बच्ची के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एडवोकेट सुखविंदर कौर ने अपने तर्कों और सबूतों के जरिए आरोप साबित किया।


महिला अटेंडेंट की अनुपस्थिति

जांच में यह भी सामने आया कि जिस स्कूल बस में यह घटना हुई, वहाँ महिला अटेंडेंट मौजूद नहीं थी। इस लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपी ने मासूम बच्ची के साथ अपराध को अंजाम दिया। इस तथ्य ने स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी और सुरक्षा नियमों पर भी सवाल खड़े कर दिए।