पंचकूला में बैंक धोखाधड़ी मामले में पूर्व अधिकारी गिरफ्तार
पंचकूला में धोखाधड़ी का मामला
पंचकूला, 03 अप्रैल। पंचकूला नगर निगम और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े एक प्रमुख धोखाधड़ी मामले में स्टेट विजिलेंस ब्यूरो (SV&ACB) ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ब्यूरो ने पूर्व वरिष्ठ लेखा अधिकारी विकास कौशिक को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया है। जांच में यह सामने आया है कि कौशिक ने सेक्टर 11 में स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक पुष्पेंद्र सिंह के साथ मिलकर नगर निगम के करोड़ों रुपये की हेराफेरी की योजना बनाई थी। विकास कौशिक ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।
जाली दस्तावेजों का उपयोग
जाली मोहर और फर्जी बैंक खातों का मायाजाल
इस घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने मई 2020 से जून 2022 के बीच नगर निगम पंचकुला के नाम पर कई फर्जी बैंक खाते खोले। इन खातों को खोलने के लिए तत्कालीन कमिश्नर सुमेधा कटारिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और जाली मोहरों का इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने निगम की वैध फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को समय से पहले तुड़वा दिया और उस रकम को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया। इस धोखाधड़ी को छिपाने के लिए बैंक अधिकारियों ने निगम को फर्जी ईमेल और जाली स्टेटमेंट भी भेजे ताकि किसी को शक न हो।
घोटाले की रकम का उपयोग
बिल्डरों तक पहुंची घोटाले की रकम
विजिलेंस की जांच में पैसे का एक लंबा ट्रेल (Money Trail) सामने आया है। फर्जी खातों से पैसा निकालकर रजत डहरा और स्वाति तोमर जैसे व्यक्तियों के निजी खातों में भेजा गया। इसके बाद इस मोटी रकम को कई बिल्डरों को लोन के रूप में दिया गया ताकि उस पर भारी ब्याज और मुनाफा कमाया जा सके। यह घोटाला तब खुला जब जुलाई 2025 और फरवरी 2026 में नगर निगम ने अपने खातों का मिलान करना चाहा और बैंक के जवाबों में भारी विसंगतियां पाई गईं। बैंक ने अब तक 127 करोड़ रुपये की मूल राशि निगम को लौटा दी है, जबकि एफडी की कुल मैच्योरिटी वैल्यू 158 करोड़ रुपये से अधिक थी।
मुख्य आरोपी की तलाश जारी
चौथी गिरफ्तारी के बाद अब मुख्य आरोपी की तलाश
विकास कौशिक इस मामले में गिरफ्तार होने वाले चौथे आरोपी हैं। इससे पहले 25 मार्च को रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप सिंह राघव को पकड़ा गया था। इसके बाद 70 करोड़ रुपये प्राप्त करने वाले रजत डहरा और 2.36 करोड़ रुपये लेने वाले राजपुरा के कपिल की गिरफ्तारी हुई। हालांकि, बैंक का तत्कालीन डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में विजिलेंस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। यह मामला सीधे तौर पर आम जनता के टैक्स के पैसे की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है और प्रशासन अब उन बिल्डरों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है जिन्होंने इस काली कमाई का इस्तेमाल किया।
