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पंजाब में बाढ़ की स्थिति: राहत कार्यों के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन

पंजाब में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति अमृतसर और अन्य प्रभावित जिलों में स्थायी रूप से तैनात रहेगी। मुख्यमंत्री ने सरकारी तंत्र को सक्रिय करने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। रावी नदी में जलस्तर 14.11 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया है, जो 1988 के रिकॉर्ड को तोड़ता है। जानें इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार की योजनाएं और उपाय।
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पंजाब में बाढ़ की स्थिति: राहत कार्यों के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की निगरानी


मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। उन्होंने कहा कि यह समिति, जिसमें राजस्व, जल संसाधन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, अमृतसर और अन्य प्रभावित जिलों में स्थायी रूप से तैनात रहेगी।


मुख्यमंत्री ने डिप्टी कमिश्नरों और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस समिति के आदेशों का पालन सुनिश्चित करें ताकि बाढ़ पीड़ितों को आवश्यक राहत मिल सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस संकट से लोगों को निकालने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।


सरकारी तंत्र को सक्रिय करने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और राहत कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी तंत्र को सक्रिय करें। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों में तेजी लाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को अधिकतम सहायता प्रदान करना होना चाहिए।


पानी के स्तर में वृद्धि का अलार्म

मुख्यमंत्री ने बताया कि पहाड़ी राज्यों से नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। रावी नदी में 14.11 लाख क्यूसेक पानी आया है, जो अब तक का सबसे अधिक है। 1988 में आई बाढ़ के दौरान भी इस नदी में 11.20 लाख क्यूसेक पानी आया था।


उन्होंने हरियाणा और राजस्थान को पत्र लिखकर नदियों से अधिकतम पानी निकालने के लिए कदम उठाने की बात कही।


राहत कार्यों का निरंतर संचालन

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों के कर्मचारी दिन-रात राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि मेडिकल टीमें हर गांव में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें और बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक कदम उठाएं।


इसके अलावा, पानी के नमूने लेने, स्प्रे छिड़काव, पानी का क्लोरीनीकरण, बुखार का सर्वेक्षण, मलेरिया और डेंगू की पहचान के लिए कार्ड टेस्ट और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया।