पंजाब में महिलाओं के कैंसर के मामलों में वृद्धि: 13,299 मौतें और चिंताजनक कारण
पंजाब में कैंसर की गंभीरता
चंडीगढ़: पंजाब में महिलाओं के लिए कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। 2021 से 2025 के बीच, राज्य में कैंसर के कारण 13,299 महिलाओं की मृत्यु हुई। इनमें से 7,186 महिलाओं की जान स्तन कैंसर के कारण गई, जबकि 3,502 महिलाओं ने सर्वाइकल कैंसर से अपनी जान गंवाई। इसके अलावा, अंडाशय और गर्भाशय कैंसर के चलते 2,611 महिलाओं की मौत हुई।
ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि महिलाओं में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। वर्तमान में, औसतन प्रतिदिन आठ महिलाएं कैंसर के कारण अपनी जान खो रही हैं।
कैंसर के मामलों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। 2021 में 39,251 मामले सामने आए थे, जो 2025 तक बढ़कर 43,196 हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का एक मुख्य कारण समय पर जांच न कराना और जागरूकता की कमी है। लगभग 65 प्रतिशत मामलों में कैंसर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है, जिससे उपचार जटिल हो जाता है और मरीज के बचने की संभावना कम हो जाती है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं अक्सर सामाजिक झिझक, डर और जानकारी की कमी के कारण जांच से बचती हैं। प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज करने से बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरणीय कारक भी कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। प्रदूषित पानी, औद्योगिक कचरा और खेतों में रासायनों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। लंबे समय तक इनसे संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा, बदलती जीवनशैली भी एक महत्वपूर्ण कारण है। शारीरिक गतिविधियों की कमी, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। पहले कैंसर अधिकतर बुजुर्ग महिलाओं में देखा जाता था, लेकिन अब 50 से 56 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर जांच कराई जाए, तो स्तन और सर्वाइकल कैंसर जैसे रोगों का सफलतापूर्वक इलाज संभव है।
