पप्पू यादव ने संसद में महिला आरक्षण बिल पर उठाए गंभीर सवाल
संसद में पप्पू यादव का विवादास्पद बयान
लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान, पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कुछ ऐसे बयान दिए हैं, जो काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं। उन्होंने नेताओं द्वारा अश्लील फिल्में देखने और यौन शोषण के मामलों का उल्लेख किया, जिससे संसद में उपस्थित लोगों ने बार-बार 'शेम-शेम' कहा। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सांसद और नेता यौन शोषण के मामलों में सबसे अधिक संलिप्त हैं।
विधेयकों का विरोध
पप्पू यादव ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए तीन विधेयकों का विरोध किया। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन, परिसीमन विधेयक 2026 और महिला आरक्षण बिल पर सवाल उठाते हुए इसे एक साजिश करार दिया। उन्होंने ओबीसी, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
महिला आरक्षण पर पप्पू यादव की टिप्पणी
महिला आरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा, 'मनुवादियों ने महिलाओं का सम्मान नहीं किया और अब आरक्षण की बात कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 755 सांसदों पर यौन शोषण के आरोप हैं और 155 सांसदों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।
महिलाओं के शोषण पर चिंता
पप्पू यादव, सांसद, पूर्णिया:-
नेताओं में सबसे ज्यादा गूगल पर पोर्न देखने की आदत है।
पप्पू यादव ने यह भी कहा कि सिनेमा, मीडिया, फैशन और विजिबिलिटी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं का शोषण 80 प्रतिशत तक होता है। उन्होंने मणिपुर को भारत का सबसे काला अध्याय बताया और कहा कि बिहार में सीबीआई ने अपराधियों को क्लीन चिट दे दी है।
संविधानिक संशोधन पर सवाल
पप्पू यादव ने कहा कि 2014 की नीति के अनुसार, किसी भी विधेयक को 30 दिन के लिए सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा जाना चाहिए, लेकिन इस संवैधानिक संशोधन की प्रतियां सांसदों को सत्र शुरू होने से केवल दो दिन पहले दी गईं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए बताया।
पप्पू यादव, सांसद, पूर्णिया:-
महिलाओं को असली सम्मान और अधिकार नहीं मिले हैं।
सामाजिक न्याय की आवश्यकता
पप्पू यादव ने तर्क किया कि गांवों की गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाएं किस प्रकार के अभाव और संकट का सामना कर रही हैं, यह नीति निर्माताओं को समझना चाहिए। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के पक्ष में रहते हुए भी सवाल उठाया कि यह बिल वास्तविक सामाजिक-आर्थिक न्याय से क्यों नहीं जुड़ रहा है।
पप्पू यादव, सांसद, पूर्णिया:-
IAS कैडर, पुलिस और सेना में एससी, एसटी, ओबीसी, ईबीसी और अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है।
प्रतिनिधित्व की कमी
पप्पू यादव ने कहा कि देश के 100 बड़े उद्योगपतियों, चैनल मालिकों और धार्मिक ट्रस्टों में दलित, एसटी, एससी, ईबीसी या ओबीसी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि इन तबकों की आवाज कौन उठाएगा।
