पवन खेड़ा को हाई कोर्ट से मिली बड़ी निराशा, अग्रिम जमानत याचिका खारिज
पवन खेड़ा को हाई कोर्ट से झटका
नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। उनकी अग्रिम जमानत की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। पवन खेड़ा ने इस मामले में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी के पास कई पासपोर्ट हैं। इससे पहले अदालत ने उन्हें ट्रांजिट बेल देने से भी मना कर दिया था। खेड़ा ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि उन्हें कुछ समय दिया जाए ताकि वह असम की अदालत में नियमित जमानत के लिए याचिका दायर कर सकें।
पवन खेड़ा की दलीलें
पवन खेड़ा के वकील ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में यह तर्क दिया कि कांग्रेस नेता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है और इसलिए उनकी गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मुख्यमंत्री सरमा की टिप्पणियां, विशेषकर विधानसभा चुनावों के संदर्भ में, राजनीतिक प्रतिशोध की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के भागने का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।
असम सरकार का विरोध
असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला साधारण मानहानि का नहीं है, बल्कि दस्तावेजों की जालसाजी से संबंधित है। उन्होंने बताया कि मुख्य अपराध धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े हैं। सैकिया ने यह भी कहा कि खेड़ा को अंतरिम सुरक्षा का हक नहीं है क्योंकि उनके भागने का खतरा है।
मामले की पृष्ठभूमि
सीएम सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में खेड़ा और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने पहले खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी। असम विधानसभा चुनाव के बीच यह मामला काफी चर्चा में है। कांग्रेस के आरोपों के बाद सीएम सरमा ने सीधे पवन खेड़ा को निशाने पर लिया था।
