पश्चिम एशिया में तनाव और तेल बाजार पर असर
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: वर्तमान में पश्चिम एशिया गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले दो हफ्तों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान ने चेतावनी दी कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। इस चेतावनी के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ गई और आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई।
अमेरिका का नया कदम
इस संकट के बीच, अमेरिका ने अचानक कुछ देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी मंजूरी देने का निर्णय लिया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि 12 मार्च को सुबह 12:01 बजे या उससे पहले जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से संबंधित लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह आदेश 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा।
तनाव का बढ़ता प्रभाव
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पिछले 14 दिनों से अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हमले और इसके जवाब में ईरान द्वारा इज़राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए जा रहे हमलों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने का प्रयास
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही, यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत को मिली छूट
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका ने भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी। 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष अनुमति दी थी, जिसके तहत भारत रूस से तेल खरीद सकता है। ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए लिया गया है।
