पश्चिम एशिया में तनाव का नया केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का असर
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह संघर्ष इतना लंबा चलेगा। अमेरिका ने ईरान के प्रतिरोध को देखते हुए युद्ध विराम की घोषणा की, लेकिन इससे पहले ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को घेर लिया, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
अब होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का मुख्य केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल सप्लाई होती है। ईरान ने यहां शिपिंग नियंत्रण के लिए नए प्रस्ताव पेश किए हैं, जिसमें कुछ समुद्री रास्तों को सीमित करने की बात की गई है।
संवेदनशील स्थिति
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति को मजबूत किया है, जिससे टकराव की आशंका बढ़ गई है। ईरान भी अपने रुख पर अडिग है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका बातचीत के संकेत दे रहा है, लेकिन तेहरान को वॉशिंगटन की नीयत पर भरोसा नहीं है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि ईरान की 14 सूत्रीय शांति योजना के अलावा कोई भी प्रस्ताव बेकार साबित होगा।
हवाई हमलों की संभावना
ट्रंप का हालिया बयान ईरान के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ हवाई हमले फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुन सकता है।
एक अमेरिकी समाचार पत्र ने दावा किया है कि ट्रंप अपनी ईरान नीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की तैयारी कर रहे हैं। व्हाइट हाउस में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संभावित सैन्य योजनाओं पर चर्चा चल रही है। ट्रंप ने पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि शीघ्र कोई शांति समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के लिए 'बहुत बुरा समय' आ सकता है।
