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पश्चिम बंगाल की अदालतों में बम धमकी से मचा हड़कंप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल में मंगलवार को कोलकाता सहित छह प्रमुख अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिससे न्यायिक कार्य ठप हो गया। पुलिस ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अदालतों को खाली कराया और जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिला। यह घटना मतदाता सूची संशोधन कार्य के बीच हुई, जिससे सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। राज्य के साइबर क्राइम विंग ने धमकी के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि SIR प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
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पश्चिम बंगाल की अदालतों में बम धमकी से मचा हड़कंप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

बंगाल में बम धमकी का मामला


बंगाल : मंगलवार दोपहर को पश्चिम बंगाल के न्यायालयों में उस समय तनाव का माहौल बन गया जब कोलकाता समेत छह प्रमुख जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल प्राप्त हुए। कोलकाता के सिटी सिविल कोर्ट और बैंकशॉल कोर्ट के साथ-साथ हुगली, बर्दवान और मुर्शिदाबाद की अदालतों को तुरंत खाली कराया गया। स्निफर डॉग्स और बम निरोधक टीमों द्वारा गहन जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिला। यह घटना राज्य में मतदाता सूची संशोधन कार्य के बीच सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चुनौती पेश करती है।


अदालतों में अफरा-तफरी का माहौल

ईमेल की सूचना मिलते ही कोलकाता, चिनसुराह, आसनसोल और दुर्गापुर की अदालतों में न्यायिक कार्य ठप हो गया। पुलिस ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत इमारतों को तुरंत खाली करवाया। दोपहर दो बजे तक चली सघन तलाशी के बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह केवल एक फर्जी कॉल या ईमेल था। इस घटना ने वकीलों और वादियों के बीच डर का माहौल बना दिया। एहतियात के तौर पर राज्य की अन्य महत्वपूर्ण अदालतों में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।


सुप्रीम कोर्ट का विशेष हस्तक्षेप

यह धमकियां उस समय आईं जब राज्य के न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया में व्यस्त थे। मतदाता सूची में विसंगतियों को देखते हुए, सर्वोच्च अदालत ने पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को बंगाल के जजों के साथ इस कार्य में लगाया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लगभग 60 लाख मतदाताओं से जुड़े विवादित दावों और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी का निपटारा करना है। जजों की इस महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्तता के कारण ही सुरक्षा चिंताओं को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।


साइबर क्राइम विंग की सक्रियता

राज्य के साइबर क्राइम विंग ने धमकी भरे ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच तेज कर दी है। दुर्गापुर कोर्ट के जिला जज देवप्रसाद नाथ ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों के तहत ही अदालतों को खाली कराया गया था। प्रशासन इसे SIR प्रक्रिया को बाधित करने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में भी देख रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए दोषियों तक पहुंचने की कोशिशें जारी हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसके पीछे कौन है।


सुरक्षा और निरंतरता का भरोसा

नबन्ना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, डीजीपी पीयूष पांडे और पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने राज्य की जनता और न्यायिक अधिकारियों को आश्वस्त किया कि किसी भी धमकी से डरने की जरूरत नहीं है। सरकार ने वादा किया है कि SIR अभ्यास किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले ही राज्य सरकार को सभी कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा देने का बहुत कड़ा और स्पष्ट निर्देश दिया था।


साजिश या महज एक अफवाह

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन को लेकर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। ऐसे में फर्जी बम धमकियां न्यायिक अधिकारियों को डराने या SIR प्रक्रिया की गति धीमी करने का प्रयास हो सकती हैं। 60 लाख मतदाताओं से जुड़ा यह सुधार कार्य निष्पक्ष चुनाव के लिए अनिवार्य है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में नहीं आएगा और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने का कार्य तय समय सीमा में हर हाल में पूरा किया जाएगा।