पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनावी माहौल
गुरुवार, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान के लिए 152 सीटों पर वोटिंग होनी थी। लेकिन इससे एक दिन पहले, बुधवार, 22 अप्रैल को, सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई की। इस दौरान सर्वोच्च अदालत ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर तीखी टिप्पणियां कीं। यह मामला तृणमूल कांग्रेस के चुनाव प्रबंधन से जुड़े आईपैक पर 8 जनवरी को हुए छापे से संबंधित है। उस समय ममता बनर्जी आईपैक के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के निवास पर पहुंच गई थीं, जहां छापा चल रहा था। ईडी ने आरोप लगाया कि ममता ने वहां से कुछ सामान छीन लिया और अपने साथ ले गईं। इसके बाद आईपैक पर और भी छापे पड़े, जिसके निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया गया। हाल ही में यह भी खबर आई है कि आईपैक ने अपना काम बंद कर दिया है।
केरल में भी चुनावी समय पर हुई सुनवाई
इसी तरह का एक संयोग 7 अप्रैल को भी देखने को मिला। 9 अप्रैल को केरल में मतदान होना था, और प्रचार बंद होने के ठीक दो दिन पहले, सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित मामले की सुनवाई हुई। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा दिया था। कुछ समय बाद एक नई बेंच का गठन हुआ, जिसमें नौ जजों की संविधान पीठ ने 7 अप्रैल को सुनवाई शुरू की। इस दौरान केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा और महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का विरोध किया। यह ध्यान देने योग्य है कि भाजपा का यह हमेशा से स्टैंड रहा है कि आस्था के मामलों में कानून को दखल नहीं देना चाहिए।
