पश्चिम बंगाल में आईपीएस अधिकारियों का निलंबन: सीएम सुवेंदु अधिकारी का कड़ा कदम
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कड़े फैसले
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की नई सरकार के गठन के बाद से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं। हाल ही में, उन्होंने आरजी कर रेप केस से जुड़े तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित करने का बड़ा कदम उठाया है। यह मामला पूर्व की ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में विवादों में रहा था।
बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से इस मामले में कार्रवाई की संभावना जताई जा रही थी। आज जब सीएम सुवेंदु ने तीन आईपीएस अधिकारियों के निलंबन की घोषणा की, तो यह कयास सच साबित हुए। उल्लेखनीय है कि हाल के विधानसभा चुनाव में आरजी रेप केस की पीड़िता की मां को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया था, और वह चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं।
सीएम का बयान
सीएम ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नई सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में अराजकता का माहौल था, जिसे समाप्त करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरजी रेप केस के संदर्भ में कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है। निलंबित अधिकारियों में कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर इंदिरा मुखर्जी शामिल हैं।
रिश्वत देने का आरोप
पीड़ित परिवार को रिश्वत देने का आरोप
सीएम शुभेंदु ने बताया कि ये अधिकारी पीड़ित परिवार को रिश्वत देने और बिना लिखित आदेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने में शामिल थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, उन्हें जानकारी मिली है कि कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में स्मार्टफोन का उपयोग किया जा रहा था, जिसकी जांच की गई और आरोप सही पाए गए।
मामले का विवरण
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 9 अगस्त 2024 का है, जब कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में एक जूनियर डॉक्टर का शव मिला था। जांच में पता चला कि 33 वर्षीय सिविक वॉलंटियर संजय रॉय ने इस वीभत्स घटना को अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन पीड़ित परिवार का मानना है कि वह अकेला नहीं था और पुलिस अन्य संदिग्धों को बचाने की कोशिश कर रही है। इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिससे ममता सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा था।
