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पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई: सरकारी राशन घोटाले में छापेमारी

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले ईडी ने सरकारी राशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 9 ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें कई नामी कारोबारियों के शामिल होने की बात सामने आई है। इस घोटाले में गरीबों का राशन लूटने का आरोप है, जिसमें सप्लायर्स ने सरकारी गेहूं को बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा। जानें इस मामले की पूरी कहानी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ।
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पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई: सरकारी राशन घोटाले में छापेमारी

राजनीतिक हलचल के बीच ईडी की छापेमारी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर से सक्रियता दिखाई है। इस जांच एजेंसी ने पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत शनिवार को राज्य के विभिन्न स्थानों पर 9 ठिकानों पर छापेमारी की। ईडी की टीमों ने कोलकाता, बर्धवान और हाबरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में दबिश देकर घोटाले में शामिल लोगों को चौंका दिया है। पहले चरण की वोटिंग से पहले भी ईडी ने कई छापे मारे थे, और अब एक बार फिर से शुरू हुई इस कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है, जहां सत्ताधारी टीएमसी इसे केवल चुनावी रणनीति मानती है।


गरीबों का राशन कैसे लूटा गया

ईडी के अधिकारियों के अनुसार, इस बड़े घोटाले में शामिल सभी सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स ने एक सुनियोजित तरीके से काम किया। इन्होंने विभिन्न चैनलों के माध्यम से सप्लायरों और डिस्ट्रीब्यूटरों से बहुत कम कीमत पर गेहूं खरीदा। इसके बाद, इस सरकारी राशन को जरूरतमंदों में बांटने के बजाय बाजार में ऊंचे दाम पर बेचा गया, जिससे करोड़ों रुपये की काली कमाई की गई। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में गेहूं को विभिन्न स्थानों पर जमा करके उसकी जमाखोरी भी की गई। कोलकाता स्थित ईडी का जोनल कार्यालय इस पूरे सिंडिकेट की गहन जांच कर रहा है।


नामी कारोबारियों पर शिकंजा

शनिवार को हुई इस छापेमारी में कई प्रमुख कारोबारियों और उनकी कंपनियों को जांच के दायरे में लिया गया है। ईडी की टीमों ने निरंजन चंद्र साहा, सुशांत साहा और उनकी कंपनी 'सागर इंटरप्राइजेज' पर छापेमारी की। इसके अलावा, समीर कुमार चंद्र और पार्थ साहा की कंपनियों 'मां अन्नपूर्णा राइस कंसर्न', 'आदर्श इंटरनेशनल' और 'साइनैक्स अन्नपूर्णा उद्योग' के ठिकानों की भी जांच की जा रही है। उत्तरपारा के एक अन्य प्रमुख कारोबारी दौलत राम गुप्ता के ठिकानों पर भी ईडी ने दस्तक दी है और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जब्त किया है।


घोटाले का खुलासा कैसे हुआ

यह घोटाला तब सामने आया जब कस्टम विभाग के डिप्टी कमिश्नर ने शिकायत दर्ज कराई कि सरकारी गेहूं या तो अन्य स्थानों पर बेचा गया है या फिर उसकी जमाखोरी की गई है। इस शिकायत के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने 23 अक्टूबर 2020 को बसीरहाट पुलिस थाने में पहली एफआईआर दर्ज की। प्रारंभिक जांच के बाद, एक विशाल घोटाले का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में लेते हुए कार्रवाई शुरू की।