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पश्चिम बंगाल में ईडी छापों पर ममता बनर्जी का प्रतिरोध

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया। यह छापेमारी एक पांच साल पुराने कोयला तस्करी मामले में की गई है, जो चुनावों से पहले की एक स्थापित परंपरा का हिस्सा है। जानें कैसे ममता ने इस स्थिति को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है और अन्य राज्यों में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं।
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पश्चिम बंगाल में ईडी छापों पर ममता बनर्जी का प्रतिरोध

पश्चिम बंगाल में ईडी की छापेमारी पर राजनीतिक हलचल

पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो तृणमूल कांग्रेस की नेता हैं, ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। वे अन्य नेताओं से भिन्न हैं, जो अक्सर मौन रहते हैं। ममता ने सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया और उनकी पुलिस ने भी ईडी के अधिकारियों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए। यह पहली बार नहीं है जब चुनावों से पहले ईडी ने छापे मारे हैं; यह एक स्थापित परंपरा बन गई है।


पश्चिम बंगाल में छापेमारी एक पांच साल पुराने मामले में की गई है, जो कोयला तस्करी से संबंधित है। यह मामला 2020 में दर्ज किया गया था, जबकि छापेमारी 2026 के चुनावों से पहले की गई। इसी तरह, झारखंड में ईडी ने अगस्त 2023 में मामला दर्ज किया और जनवरी 2024 में कार्रवाई की, जब चुनाव नजदीक थे। दिल्ली में भी, 2022 में शराब नीति को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ और इसके बाद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई।


महाराष्ट्र में भी 2024 के चुनावों से पहले ईडी की कार्रवाई हुई थी। हालांकि, अन्य राज्यों के नेताओं की तुलना में ममता बनर्जी अधिक सक्रिय और प्रतिरोधी हैं, जिससे बंगाल का मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। ममता ने इस स्थिति को अपने राजनीतिक लाभ के लिए भी इस्तेमाल किया है।