पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की चुनावी चुनौतियाँ: मुर्शिदाबाद और मालदा पर ध्यान केंद्रित
कांग्रेस की चुनावी स्थिति
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी केवल दो जिलों, मुर्शिदाबाद और मालदा, में चुनावी मुकाबले में गंभीरता से भाग ले रही है। मुर्शिदाबाद की फरक्का सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार का मामला जटिल हो गया है। कांग्रेस ने माहताब शेख को उम्मीदवार के रूप में चुना था, लेकिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान उनका नाम हटा दिया गया। उन्हें पहले विचाराधीन श्रेणी में रखा गया, और बाद में न्यायिक अधिकारी ने उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया।
इस बीच, ट्रिब्यूनल ने अभी तक अपना कार्य शुरू नहीं किया है, जिसके चलते माहताब शेख ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च अदालत के निर्देश पर साल्ट लेक में ट्रिब्यूनल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उनकी याचिका पर सुनवाई हुई। उन्होंने अपना पासपोर्ट पेश किया, जिसे ट्रिब्यूनल के जज ने प्रमाण के रूप में स्वीकार किया और चुनाव आयोग को आदेश दिया कि माहताब शेख का नाम मतदाता सूची में पुनः शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री का विरोध और तृणमूल कांग्रेस की स्थिति
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाम कटने के मामले में विरोध जताया है, लेकिन फरक्का में कांग्रेस उम्मीदवार का नाम हटने से तृणमूल कांग्रेस को खुशी हुई। यदि कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव में भाग नहीं ले पाता, तो तृणमूल कांग्रेस के लिए मुकाबला एकतरफा हो जाता। उनके उम्मीदवार और मौजूदा विधायक अमीरुल इस्लाम आसानी से जीत जाते। यह ध्यान देने योग्य है कि तृणमूल कांग्रेस ने पहली बार फरक्का सीट पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने लगातार पांच बार इस सीट पर जीत दर्ज की थी।
पिछले चुनाव में, अमीरुल इस्लाम ने भाजपा के हेमंत घोष को 60 हजार वोटों से हराया था, जबकि कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही थी। इस बार, अधीर रंजन चौधरी मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, और मौसम नूर मालदा की मालतीपुर सीट से चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस इस बार इन दो जिलों में मजबूती से चुनावी रणनीति बना रही है।
