पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी के गंभीर आरोप: क्या महिलाएं हो रही हैं निशाने पर?
चुनाव आयोग की मतदाता सूची में विवाद
बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा की जा रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया, जिसे 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) कहा जाता है, ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के खिलाफ सबसे अधिक विरोध देखा जा रहा है। पहले तृणमूल कांग्रेस ने बीएलओ की मौत पर सवाल उठाए थे, और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महिलाओं के नामों को निशाना बनाने और उन्हें वोटर लिस्ट से हटाने का गंभीर आरोप लगाया है।
ममता बनर्जी के आरोप
ममता बनर्जी का कहना है कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाएं और जिनका निवास स्थान बदल गया है, उन्हें जानबूझकर मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कोई व्यक्ति हमेशा एक ही स्थान पर रहता है और क्या महिलाओं को उनके जीवन में आए बदलावों के कारण सूची से हटाना उचित है।
महिलाओं का वोट और सियासी संदेश
ममता का यह बयान विधानसभा चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि महिलाओं का वोट तृणमूल कांग्रेस के लिए एक मजबूत आधार है। पिछले चुनावों में, महिला मतदाताओं ने ममता को भरपूर समर्थन दिया था। उन्होंने महिलाओं के लिए 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाएं शुरू की थीं, जो आर्थिक सहायता और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं। ममता ने इस राजनीतिक संदेश के जरिए महिलाओं को 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले आश्वस्त करने का प्रयास किया है।
मतदाता सूची में कटौती
SIR प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट लिस्ट से 54 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, और जिनका मैपिंग में पता नहीं चल पाया, उन्हें नोटिस भेजकर सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। ममता ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों के मतदाताओं के नाम पश्चिम बंगाल की सूची में जोड़े जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक हेरफेर की आशंका बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश में भी स्थिति गंभीर
उत्तर प्रदेश में भी SIR के दौरान महिलाओं के नाम पुरुषों की तुलना में अधिक हटाए गए हैं। कई जिलों में पुरुष-महिला अनुपात में 3-5 प्रतिशत का अंतर देखा गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमला किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि SIR में अधिकारी भाजपा के पदाधिकारियों के साथ मिलकर नकली मतदाता जोड़ते पाए गए, तो उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।
बिहार में भी विवाद
बिहार में भी इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था, हालांकि चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया था। अब पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में यह मुद्दा फिर से उभरकर सामने आया है, जिससे राजनीतिक दलों की नजर महिलाओं के वोट पर केंद्रित हो गई है। SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची संशोधन को लेकर राजनीतिक और लोकतांत्रिक सवाल लगातार उठ रहे हैं।
