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पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए समिति का गठन

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के कार्यान्वयन के लिए एक नई समिति का गठन किया है। यह समिति नागरिकता आवेदनों की जांच और स्वीकृति का कार्य करेगी। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे सही व्यक्तियों को नागरिकता मिलेगी, जबकि ममता बनर्जी की सरकार ने इसे चुनावी रणनीति के रूप में देखा है। जानें इस समिति के सदस्यों और टीएमसी के विरोध के बारे में।
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पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए समिति का गठन

नागरिकता संशोधन अधिनियम की निगरानी के लिए समिति


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले, केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के कार्यान्वयन की निगरानी हेतु एक 'सशक्त समिति' का गठन किया है। यह समिति नागरिकता आवेदनों की जांच और उन्हें स्वीकृति देने का कार्य करेगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सभी आवेदक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के तहत निर्धारित सभी आवश्यकताओं को पूरा करें।


केंद्र सरकार का दृष्टिकोण

केंद्र सरकार का कहना है कि इस समिति के गठन से सही व्यक्तियों को भारत की नागरिकता प्राप्त होगी। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की सरकार ने इसे जनता के खिलाफ एक कदम बताया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इसे चुनाव से पहले वोट काटने की योजना के रूप में देखा है।


CAA कार्यान्वयन समिति के सदस्य

गृह मंत्रालय के आदेशानुसार, इस समिति में विभिन्न अधिकारियों का समावेश होगा। इसमें सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक अधिकारी, क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी द्वारा नामित एक अधिकारी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी द्वारा नामित एक अधिकारी, और पश्चिम बंगाल के पोस्ट मास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित कोई डाक अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल राज्य सरकार के प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कार्यालय का एक प्रतिनिधि और रेलवे के क्षेत्रीय मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का एक प्रतिनिधि भी समिति में होगा। इस कदम को बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


ममता सरकार का विरोध

बंगाल की सीमा बांग्लादेश से जुड़ी हुई है, जहां लाखों गैर-मुस्लिम लोग विस्थापित होकर बंगाल में बस चुके हैं। सरकार के इस कदम से मतुआ और बंगाली हिंदू, जो लंबे समय से भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उनका सपना पूरा हो सकता है। हालांकि, टीएमसी का मानना है कि इससे लाखों लोगों का मतदान अधिकार छिन सकता है। टीएमसी महासचिव ने इन समुदायों को ऐसे शिविरों से दूर रहने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आश्वासन दिया है कि वह बंगाल में CAA को लागू नहीं होने देंगी। वहीं, केंद्र सरकार का मानना है कि यह समिति जमीनी स्तर पर काम करेगी और सभी भ्रमों को दूर करेगी।