पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का मुद्दा: घुसपैठ और सुरक्षा चिंताएँ
बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ का मुद्दा
पश्चिम बंगाल के चुनावों में बांग्लादेश सीमा से होने वाली घुसपैठ एक प्रमुख चर्चा का विषय बनी रही। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह घुसपैठियों की सहायता कर रही है, जिसके चलते बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं करवा रही है। अब जब भाजपा सत्ता में आ गई है, उसने भूमि प्रदान कर दी है और कहा है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी जल्द ही पूरी की जाएगी। इस संदर्भ में कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी बंगाल सरकार को चेतावनी दी थी कि वह भूमि देने में देरी कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस सीमा से सबसे अधिक घुसपैठ हुई है, और यह सीमा पश्चिम बंगाल में बिना बाड़बंदी के है।
केंद्रीय गृहमंत्री का बयान
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में बताया कि पश्चिम बंगाल में बाड़बंदी का कार्य बाकी है। तृणमूल कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भूमि दी जाती है, तो इससे किसानों को बेघर होना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल के अलावा असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम की सीमाएं भी बांग्लादेश से जुड़ी हुई हैं, लेकिन अधिकांश सीमाओं पर बाड़बंदी की जा चुकी है।
बाड़बंदी का महत्व
सीमा पर बाड़ न होने के कारण कई आपराधिक गतिविधियाँ होती हैं। अवैध घुसपैठिए बांग्लादेश से भारत में प्रवेश करते हैं और विभिन्न राज्यों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इसके अलावा, भारतीय अपराधी भी बांग्लादेश और अन्य देशों में भाग जाते हैं। पिछले एक दशक के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत और बांग्लादेश की सीमा पर सबसे अधिक घुसपैठ होती है।
घुसपैठ के आंकड़े
दिसंबर 2025 में सांसद जगदीश चंद्र बर्मा और डॉ. शर्मिला सरकार ने लोकसभा में घुसपैठ से संबंधित सवाल पूछे थे। इस सवाल में 2014 से अब तक हुई घुसपैठ की संख्या और बिना बाड़बंदी वाली सीमाओं की जानकारी मांगी गई थी। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने इस पर लिखित उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान की 93.25 प्रतिशत सीमा और भारत-बांग्लादेश की 79.08 प्रतिशत सीमा पर बाड़बंदी की गई है।
घुसपैठ के मामलों की तुलना
यदि साल दर साल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सबसे अधिक घुसपैठ के मामले भारत-बांग्लादेश सीमा से सामने आए हैं। वहीं, 2014 से 2024 तक भारत-चीन सीमा पर कोई घुसपैठ की घटना नहीं हुई। भारत-पाकिस्तान सीमा पर हर साल औसतन 40 घुसपैठ के मामले सामने आते हैं। भारत-म्यांमार सीमा पर 2014 में 855, 2015 में 874, 2016 में 654, 2017 में 456, 2018 में 420, 2019 में 50, 2020 में 486, 2021 में 703, 2022 में 857, 2023 में 746 और 2024 में 977 मामले दर्ज किए गए।
2025 के आंकड़े
2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत-पाकिस्तान सीमा पर हर महीने 2 से 5 घुसपैठ की घटनाएँ हुईं, जबकि भारत-बांग्लादेश सीमा पर औसतन 100 घुसपैठ के मामले सामने आए। गिरफ्तारियों के मामले में, जनवरी 2025 में 190 लोग गिरफ्तार हुए, जबकि अक्टूबर 2025 में यह संख्या बढ़कर 380 हो गई।
बाड़बंदी की स्थिति
अगस्त 2025 में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र से धन मिलने के बावजूद 181.6 किलोमीटर भूमि नहीं सौंपी थी। 2025 में 229.31 किलोमीटर भूमि के अधिग्रहण का कार्य चल रहा था। 31 किलोमीटर भूमि को बंगाल कैबिनेट ने मंजूरी नहीं दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल में भारत और बांग्लादेश की कुल 2216.7 किलोमीटर लंबी सीमा में से 1647.69 किलोमीटर की बाड़बंदी हो चुकी है।
