पश्चिम बंगाल में भाजपा का चुनावी रणनीति: मुस्लिम नेताओं को प्रचार से दूर रखा गया
भाजपा की नई चुनावी रणनीति
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम नेताओं को चुनाव प्रचार से बाहर रखा है। राज्य में भाजपा के पास सीमित संख्या में मुस्लिम नेता हैं, और जिनके पास हैं, उनका प्रभाव भी कम है। फिर भी, मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भाजपा ने कुछ मुस्लिम नेताओं को खड़ा किया था, लेकिन इस बार उन्हें प्रचार से हटा दिया गया है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी इस बार पूरी तरह से ध्रुवीकरण के एजेंडे पर चुनाव लड़ रही है।
ईद के दिन, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ नमाज अदा की, तब शुभेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर गए और वहां से बाहर आकर कहा कि माता ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि पार्टी 294 सीटों में से किसी भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं देगी। उनका उद्देश्य राज्य के 70 प्रतिशत हिंदू मतदाताओं को संदेश देना है।
पिछले दो लोकसभा और विधानसभा चुनावों से भाजपा ने देखा है कि हिंदू ध्रुवीकरण के बिना वे चुनाव नहीं जीत सकते। वर्तमान में, 100 में से 60 हिंदू भाजपा को वोट दे रहे हैं, लेकिन उन्हें कम से कम 70 हिंदू वोट की आवश्यकता है। इस बड़े ध्रुवीकरण के लिए भाजपा हर संभव प्रयास करेगी। चुनाव की घोषणा से पहले की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एजेंडा तय किया, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि बंगाल में हालात ऐसे ही रहे, तो हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएंगे। आगे चलकर भाजपा का प्रचार इसी दिशा में रहेगा, जिसमें बांग्लाभाषी हिंदुओं के मन में यह भावना पैदा करना शामिल होगा कि मुस्लिम आबादी और घुसपैठ बढ़ने से उनके बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
