पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर सियासी विवाद बढ़ा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद, उनके भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि SIR के नाम पर कुछ लोगों को परेशान किया जा रहा है, विशेष रूप से उन व्यक्तियों को जिन्होंने देश का नाम रोशन किया है।
अभिषेक बनर्जी का बयान
मंगलवार को एक जनसभा में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को SIR सुनवाई के लिए बुलाकर बंगाल के नागरिकों को निशाना बना रहा है। उन्होंने इसे अत्यंत दुखद बताया और कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं लगती। अभिषेक ने यह भी सवाल उठाया कि देश के प्रतिष्ठित नागरिकों को इस तरह नोटिस भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
अमर्त्य सेन और अन्य हस्तियों का जिक्र
अभिषेक ने कहा कि अमर्त्य सेन जैसे विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री को नोटिस भेजना चौंकाने वाला है। उन्होंने क्रिकेटर मोहम्मद शमी और अभिनेता देव को भेजे गए नोटिस का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह केवल जांच नहीं, बल्कि बदनाम करने और मानसिक दबाव बनाने का प्रयास प्रतीत होता है।
BJP और चुनाव आयोग का गठजोड़
TMC सांसद ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर BJP और चुनाव आयोग मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह गठजोड़ बंगाल के आम लोगों के अधिकारों पर चोट कर रहा है। अभिषेक ने कहा कि जब देश के सम्मानित नागरिकों को बार-बार सफाई देने के लिए बुलाया जाएगा, तो आम लोगों का विश्वास प्रणाली से उठना स्वाभाविक है।
देव और टॉलीवुड का मामला
इस विवाद के बीच, अभिनेता और सांसद देव को भी SIR नोटिस प्राप्त हुआ है। उनके साथ परिवार के तीन अन्य सदस्यों को भी सुनवाई के लिए बुलाया गया है। देव दक्षिण कोलकाता के स्थायी निवासी हैं और घाटल से तीन बार सांसद रह चुके हैं। इसी तरह, अभिनेता अनिर्बान भट्टाचार्य और अभिनेता दंपती कौशिक बनर्जी व लाबोनी सरकार को भी नोटिस मिल चुके हैं।
मोहम्मद शमी का मामला और चुनाव आयोग का रुख
भारतीय तेज गेंदबाज़ मोहम्मद शमी और उनके भाई को भी SIR सुनवाई के लिए बुलाया गया है। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह कदम जनगणना फॉर्म में पाई गई विसंगतियों के कारण उठाया गया। शमी फिलहाल क्रिकेट प्रतिबद्धताओं के चलते राज्य से बाहर हैं। वहीं, अमर्त्य सेन के मामले में चुनाव आयोग ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
