पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीतिक हलचल: ईडी की छापेमारी पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सक्रियता से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में केंद्रीय एजेंसियों की गतिविधियों ने एक बार फिर हलचल मचा दी है। कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अचानक वहां पहुंचना और 'ग्रीन फाइलों' को सुरक्षित करना चर्चा का विषय बन गया है। I-PAC से जुड़े स्थानों पर कार्रवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है, और केंद्र सरकार पर सीधे आरोप लगाए गए हैं। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई दिशा दी है।
I-PAC से जुड़े ठिकानों पर ईडी की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता के सेंट्रल क्षेत्र में I-PAC के वरिष्ठ अधिकारी प्रतीक जैन के निवास और सॉल्ट लेक सेक्टर-5 में स्थित गोदरेज वाटरसाइड बिल्डिंग में कंपनी के कार्यालय पर छापेमारी की। प्रतीक जैन को ममता बनर्जी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। जैसे ही छापेमारी की खबर फैली, तृणमूल कांग्रेस के नेता और समर्थक बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए।
ममता बनर्जी का केंद्र पर तीखा हमला
छापेमारी की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घटनास्थल पर पहुंचीं और केंद्रीय एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देश पर की गई है। ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए कहा कि ईडी का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
ग्रीन फाइलों को लेकर बढ़ा संदेह
ईडी की कार्रवाई के दौरान कुछ 'ग्रीन फाइलों' को ममता बनर्जी के काफिले की गाड़ी में रखे जाने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। सवाल उठने लगे कि इन फाइलों में ऐसा क्या था, जिसे तुरंत सुरक्षित करना आवश्यक समझा गया। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि ये पार्टी से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज थे, जबकि ईडी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
'रणनीति चुराने की कोशिश' का आरोप
ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि ईडी का उद्देश्य किसी आर्थिक मामले की जांच नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति तक पहुंचना था। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की सूची, पार्टी की योजनाएं और संगठनात्मक दस्तावेज जब्त करना एजेंसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। बढ़ते तनाव के बीच बिधाननगर पुलिस कमिश्नर को भी मौके पर पहुंचना पड़ा।
I-PAC और टीएमसी का पुराना राजनीतिक रिश्ता
I-PAC लंबे समय से ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की रणनीतिक साझेदार रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में I-PAC की रणनीति को टीएमसी की बड़ी जीत से जोड़ा गया था। इसके बाद दोनों के बीच करार 2026 तक बढ़ाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी I-PAC ने पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह रिश्ता और गहरा माना जाता है।
