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पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, ममता बनर्जी का शासन समाप्त

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा को भंग कर दिया है, जिससे ममता बनर्जी का शासन समाप्त हो गया है। यह निर्णय तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद लिया गया, जब ममता ने इस्तीफा देने से इनकार किया। भाजपा ने चुनाव में 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि तृणमूल केवल 80 सीटों पर सिमट गई। ममता ने हार मानने से इनकार करते हुए चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, ममता बनर्जी का शासन समाप्त

राज्यपाल का निर्णय

कोलकाता - पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार को राज्य विधानसभा को भंग करने का निर्णय लिया। यह कदम तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी द्वारा चुनाव में हार के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार करने के बाद उठाया गया।


मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी

राज्यपाल ने ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल को भी बर्खास्त कर दिया है। उन्होंने यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 174 (2) (बी) के तहत की है।


आदेश का प्रभाव

लोकभवन, कोलकाता द्वारा जारी एक पत्र में बताया गया कि विधानसभा भंग करने का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।


राजनीतिक टकराव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ गया था, खासकर ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से मना करने के कारण।


चुनाव परिणाम

ममता बनर्जी 2011 से लगातार राज्य की मुख्यमंत्री रही हैं और वह तीन बार इस पद पर रह चुकी हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 293 में से 207 सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की है, जबकि तृणमूल केवल 80 सीटों पर सिमट गई। बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए थीं, लेकिन भाजपा ने 207 सीटों के साथ यह आंकड़ा पार कर लिया है। एक सीट फाल्टा पर मतदान 21 मई को होगा और परिणाम 24 मई को घोषित किए जाएंगे।


ममता बनर्जी की हार

ममता बनर्जी को उनकी पारंपरिक सीट भवानीपुर से भाजपा के सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 15 हजार से अधिक वोटों से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है, जिससे उनका जनादेश छीन लिया गया। ममता ने कहा कि 'हम हारे नहीं हैं, बल्कि हमें हराया गया है।'