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पहलगाम में आतंकवादी हमले की दर्दनाक यादें: 26 लोगों की गई जान

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में एक भयानक आतंकवादी हमले ने 26 लोगों की जान ले ली। इस घटना के दौरान एक पर्यटक ने जिपलाइन पर रहते हुए हमले का वीडियो बनाया। जानें इस दर्दनाक घटना के बारे में और कैसे एक पर्यटक ने अपनी जान बचाई।
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पहलगाम में आतंकवादी हमले की दर्दनाक यादें: 26 लोगों की गई जान

पहलगाम में आतंकवादी हमला


पहलगाम: 22 अप्रैल, 2025 का दिन, जब पहलगाम में पर्यटकों पर एक भयानक आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोगों ने अपनी जान गंवाई। पहलगाम का बैसरन मैदान, जिसे मिनी-स्विट्जरलैंड कहा जाता है, उस दिन पर्यटकों से भरा हुआ था। लोग आनंद ले रहे थे, कुछ जिपलाइन पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, जबकि अन्य अपने खास पलों को कैमरे में कैद कर रहे थे।


इस दौरान, एक पर्यटक ने जिपलाइन पर 53 सेकंड का वीडियो बनाया। अहमदाबाद के ऋषि भट्ट कैमरे की तरफ देख रहे थे और जिपलाइन पर जाने के लिए तैयार थे। रिपोर्टों के अनुसार, जिपलाइन ऑपरेटर ने तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहा। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन अचानक बैकग्राउंड में हलचल शुरू हो गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। ऋषि को पहले कुछ समझ नहीं आया, लेकिन बाद में उन्हें गोलीबारी की आवाज सुनाई दी।




26 लोगों की हत्या:


इस हमले में 22 अप्रैल, 2025 को बैसरन मैदान में आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है। ऋषि ने बताया कि जब वह जिपलाइन पर थे, तब उन्हें नीचे क्या हो रहा है, यह तुरंत समझ नहीं आया। उन्होंने कहा कि गोलीबारी शुरू होने के लगभग 20 सेकंड बाद उन्हें एहसास हुआ कि लोग मारे जा रहे हैं।


गोलीबारी की शुरुआत:


ऋषि ने बताया कि जिपलाइन ऑपरेटर ने तीन बार 'अल्लाहु अकबर' कहा, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हुई। उन्होंने देखा कि लोग भाग रहे थे और अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ रहे थे। जब उन्हें स्थिति का अंदाजा हुआ, तो उन्होंने अपनी बेल्ट खोली और कूद गए। इसके बाद, उन्होंने अपनी पत्नी और बेटे को साथ लिया और भागने लगे।




जिपलाइन ऑपरेटर की पहचान:


वीडियो वायरल होने के बाद जिपलाइन ऑपरेटर की पहचान को लेकर सवाल उठने लगे। ऋषि ने बताया कि वह एक सामान्य कश्मीरी की तरह दिखता था। उसका नाम मुजम्मिल बताया गया, लेकिन उसके परिवार ने किसी भी गलत काम के आरोपों को खारिज कर दिया। उसके पिता ने कहा कि हम अल्लाहु अकबर कहते हैं, इसमें हमारी क्या गलती है? मुजम्मिल केवल जिपलाइन का काम करता था।