पाकिस्तान की कूटनीतिक बेचैनी: ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका से मदद की गुहार
भारत के ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
नई दिल्ली : भारत के द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य संरचना में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इस कार्रवाई ने न केवल आतंकवादी ढांचे को नुकसान पहुँचाया, बल्कि पाकिस्तान के सामरिक संतुलन को भी हिला दिया। इस स्थिति ने पाकिस्तान को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यदि संघर्ष बढ़ा, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति और भी कमजोर हो सकती है। इसी चिंता के चलते, पाकिस्तान ने सैन्य विकल्पों के बजाय कूटनीतिक उपायों को अपनाने की कोशिश तेज कर दी।
पाकिस्तान का अमेरिका की ओर रुख
अमेरिका की ओर दौड़ा पाकिस्तान
पाकिस्तान ने संकट के समय अमेरिका का सहारा लिया। वॉशिंगटन में उसने एक महंगा लॉबिंग अभियान शुरू किया, जिसका उद्देश्य भारत की सैन्य कार्रवाई को रोकना और अमेरिका से मध्यस्थता प्राप्त करना था। पाकिस्तान ने अपनी बात अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान तक पहुँचाने के लिए हर संभव प्रयास किया और इस प्रक्रिया में बड़ी राशि खर्च की।
FARA कानून के तहत खुलासे
FARA कानून से सामने आई सच्चाई
अमेरिकी Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत सार्वजनिक दस्तावेजों ने पाकिस्तान की इस रणनीति का पूरा चित्रण किया। यह कानून अमेरिका में विदेशी हितों के लिए काम करने वाले एजेंटों की गतिविधियों में पारदर्शिता लाता है। FARA फाइलिंग के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका में रजिस्टर्ड कई लॉबिंग फर्मों के माध्यम से अपनी बात पहुँचाई।
अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क
60 से ज्यादा बार किया गया अमेरिकी संपर्क
दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी अधिकारियों से लगभग 60 बार संपर्क किया। इन संपर्कों में ईमेल, फोन कॉल, संदेश और प्रत्यक्ष मुलाकातें शामिल थीं। बातचीत का मुख्य विषय भारत-पाकिस्तान तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता था, जिसमें पाकिस्तान ने अमेरिका से हस्तक्षेप की अपील की।
भारत की सैन्य कार्रवाई का संदर्भ
पहलगाम हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर
भारत ने यह सैन्य अभियान पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया। इस ऑपरेशन के दौरान, भारत ने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई की और उसके सैन्य ढांचे को भी नुकसान पहुँचाया। यह ऑपरेशन स्पष्ट संकेत देता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश
ट्रंप के करीबी लोगों तक पहुंचने की कोशिश
पाकिस्तान ने अमेरिका में प्रभाव बढ़ाने के लिए ऐसी फर्मों का चयन किया, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप के करीबी लोग शामिल थे। इन फर्मों के माध्यम से, पाकिस्तान ने व्हाइट हाउस, पेंटागन और कांग्रेस में अपनी बात रखने का प्रयास किया।
सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की साझा रणनीति
अमेरिकी रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
FARA फाइलिंग में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अमेरिका यात्रा का भी उल्लेख है। यह दर्शाता है कि यह लॉबिंग अभियान केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की साझा रणनीति थी।
इतिहास की पुनरावृत्ति
करगिल जैसी रणनीति की पुनरावृत्ति
पाकिस्तान का यह रवैया नया नहीं है। इससे पहले करगिल युद्ध के दौरान भी तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अमेरिका से हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। इस बार भी पाकिस्तान ने एक बार फिर वॉशिंगटन का रुख किया।
सैन्य कमजोरी और कूटनीतिक प्रयास
सैन्य कमजोरी, कूटनीतिक शोर
FARA दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से कमजोर कर दिया। सैन्य स्तर पर नुकसान के बाद, उसने अमेरिका में लॉबिंग को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि भारत की कार्रवाई ने न केवल जमीनी हालात बदले, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान की मजबूरी को उजागर कर दिया।
