पाकिस्तान की चिंताएँ: भारत की दुलहस्ती-2 जलविद्युत परियोजना पर प्रतिक्रिया
भारत की जलविद्युत परियोजना पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
इस्लामाबाद: केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर 260 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-दो जलविद्युत परियोजना को भारत सरकार द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद पाकिस्तान की चिंता एक बार फिर उभरकर सामने आई है। पाकिस्तान ने इसे 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन बताते हुए भारत पर मनमानी करने का आरोप लगाया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह आपत्ति अब अप्रासंगिक हो गई है, क्योंकि भारत ने पिछले साल आतंकी हमलों के जवाब में इस संधि को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद से भारत अपनी जल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए निर्णय ले रहा है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि भारत ने इस परियोजना के बारे में उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और द्विपक्षीय समझौतों की अवहेलना करार दिया। अंद्राबी ने कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से पता चला कि भारत चिनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-II का निर्माण कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों पर एकतरफा निर्माण नहीं करना चाहिए और उसे किसी भी नई परियोजना की तकनीकी जानकारी साझा करनी चाहिए।
हालांकि पाकिस्तान संधि का हवाला दे रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत अब एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। उस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने ली थी। भारत ने स्पष्ट किया था कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। 1960 की यह संधि दशकों से दोनों देशों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती रही है, लेकिन अब भारत अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है।
परियोजना के संदर्भ में, भारत के पर्यावरण मंत्रालय की एक समिति ने दिसंबर 2025 में किश्तवाड़ जिले में बनने वाली इस 'रन-ऑफ-द-रिवर' परियोजना को मंजूरी दी थी। यह मौजूदा 390 मेगावाट दुलहस्ती स्टेज-I परियोजना का विस्तार है। समिति ने यह भी नोट किया कि परियोजना के पैरामीटर संधि के अनुरूप हैं, लेकिन संधि के निलंबन के कारण भारत अब पाकिस्तान की आपत्तियों की परवाह किए बिना सिंधु बेसिन में कई रुकी हुई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
