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पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि, 300 रुपये प्रति लीटर हुआ हाई-ऑक्टेन फ्यूल

पाकिस्तान में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब देश की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सरकार ने हाई-ऑक्टेन फ्यूल पर लेवी बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर कर दी है, जिससे हर महीने 9 अरब रुपये की बचत होने की उम्मीद है। इस निर्णय के बाद पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। जानें इस आर्थिक संकट के अन्य सख्त कदमों के बारे में।
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पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि, 300 रुपये प्रति लीटर हुआ हाई-ऑक्टेन फ्यूल

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर तनाव का प्रभाव

इस्लामाबाद: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पहले से ही ऊंची चल रही तेल कीमतों के बीच, सरकार ने लग्जरी वाहनों के लिए हाई-ऑक्टेन फ्यूल पर भारी लेवी लगाने का निर्णय लिया है।


प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में लिया गया निर्णय

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसके अनुसार हाई-ऑक्टेन फ्यूल पर लेवी को बढ़ाकर 300 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पहले यह लेवी 100 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 200 रुपये किया गया और अब यह 300 रुपये प्रति लीटर हो गई है।


सरकार को होने वाली बचत

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस निर्णय से सरकार को हर महीने लगभग 9 अरब रुपये की बचत होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त राशि का उपयोग आम जनता को राहत देने वाली योजनाओं में किया जाएगा।


पेट्रोल पंपों पर भीड़

घोषणा से पहले ही कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। लोग बढ़ती कीमतों से बचने के लिए पहले ही टैंक फुल कराने पहुंचे। हालांकि, आम वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।


ईंधन की कीमतों में पहले की बढ़ोतरी

यह ध्यान देने योग्य है कि इस महीने की शुरुआत में भी पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।


सरकार के सख्त कदम

आर्थिक दबाव के चलते, सरकार ने कई सख्त निर्णय भी लिए हैं। मंत्रियों और सरकारी कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई है, सरकारी वाहनों के फ्यूल भत्ते में 50% की कमी की गई है, और सरकारी दफ्तरों में हफ्ते में चार दिन काम करने की व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा, पब्लिक सेक्टर के लगभग 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने के निर्देश दिए गए हैं।