पाकिस्तान में ऊर्जा संकट: केवल 5 दिन का कच्चा तेल बचा
पाकिस्तान का गंभीर ऊर्जा संकट
इस्लामाबाद: पाकिस्तान, जो वैश्विक मंचों पर खुद को एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, अब एक गंभीर घरेलू संकट का सामना कर रहा है। देश के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है। शहबाज शरीफ की सरकार ने स्वीकार किया है कि देश में कच्चे तेल का भंडार केवल 5 से 7 दिनों का रह गया है। इसके अलावा, डीजल और एलपीजी जैसे अन्य ईंधनों का स्टॉक भी कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की संभावना है।
भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव
पाकिस्तान में यह ऊर्जा संकट मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से जुड़ा हुआ है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है, जो कि दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल का मार्ग है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से सऊदी अरब और कुवैत पर निर्भर है, और अब इस मार्ग के बंद होने से सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है।
पेट्रोलियम मंत्री का चेतावनी भरा बयान
पाकिस्तान के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि देश में एक दिन का भी पेट्रोल रिजर्व नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि कच्चे तेल का भंडार 5 से 7 दिनों का है, जबकि डीजल का स्टॉक 26-28 दिनों के लिए और एलपीजी का केवल 15 दिनों के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा, दुबई क्रूड की कीमतें 170 डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
सख्त कदम उठाने की तैयारी
शहबाज शरीफ सरकार अब सख्त कदम उठाने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने के लिए कोविड काल के दौरान लागू किए गए लॉकडाउन जैसे नियम फिर से लागू किए जा सकते हैं। सरकारी और कॉरपोरेट दफ्तरों में कर्मचारियों को 'वर्क फ्रॉम होम' करने का निर्देश दिया जा सकता है। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों को बंद करके शिक्षा को ऑनलाइन मोड में लाने की योजना है। सरकार लोगों से निजी वाहनों का उपयोग कम करने और कार शेयरिंग की अपील कर रही है।
