पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर की हत्या: आतंकवादियों के खिलाफ अभियान जारी
पाकिस्तान में आतंकियों का सफाया
पेशावर: पाकिस्तान में छिपे आतंकियों का सफाया जारी है। खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत में अज्ञात बंदूकधारियों ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रमुख कमांडरों में से एक, शेख यूसुफ अफरीदी को मार गिराया है। अफरीदी केवल एक आतंकवादी नहीं था, बल्कि उसे लश्कर की रणनीतिक रीढ़ माना जाता था। इस घटना ने पाकिस्तान में आतंकियों के आकाओं, विशेषकर लश्कर के प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद को चिंता में डाल दिया है।
अफरीदी का आतंकवादी नेटवर्क
हाफिज सईद का करीबी सहयोगी
शेख यूसुफ अफरीदी खैबर क्षेत्र के जखा खेल कबीले से संबंधित था, जो पश्तूनों की 'अफरीदी' शाखा का हिस्सा है। वह इस्लाम की कट्टर विचारधारा का अनुयायी और एक मौलाना था। अपनी कबायली पृष्ठभूमि और चरमपंथी विचारधारा के कारण, वह हाफिज सईद का करीबी सहयोगी बन गया था। अफरीदी लश्कर-ए-तैयबा में प्रांतीय स्तर का सबसे बड़ा अधिकारी था और खैबर पख्तूनख्वा में संगठन के ब्रांच हेड के रूप में कार्यरत था। उसकी जिम्मेदारी लश्कर के आतंकी नेटवर्क को मजबूत करना और जिहादियों के बीच तालमेल बनाना था। वह स्थानीय मदरसों और मस्जिदों का उपयोग कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाता था और उन्हें भारत के खिलाफ प्रशिक्षित करता था।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड
अफरीदी भारत के खिलाफ कई आतंकी हमलों की योजना बनाने में शामिल था। जम्मू-कश्मीर में हाल के वर्षों में हुए कई बड़े हमलों के पीछे उसका नेटवर्क सक्रिय था। वह अपने कबीलाई संपर्कों का उपयोग कर आतंकियों की घुसपैठ के रास्तों को सुरक्षित बनाता था और सीमा पार से हथियारों की आपूर्ति करता था। उसकी हत्या भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए राहत और लश्कर के लिए एक बड़ा झटका है।
आतंकियों के खिलाफ अभियान का विस्तार
2026 में आतंकियों के लिए बुरा साल
शेख यूसुफ अफरीदी की हत्या पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ चल रहे एक बड़े अभियान का हिस्सा है। 2026 की शुरुआत से अब तक लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के 30 से अधिक शीर्ष पदाधिकारी मारे जा चुके हैं। यह सिलसिला लाहौर, कराची, पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान में जारी है। इन हत्याओं पर पाकिस्तानी सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञ इसे आतंकी गुटों के बीच की आपसी रंजिश या किसी गुप्त ऑपरेशन का परिणाम मानते हैं। अफरीदी की हत्या से खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर का ढांचा कमजोर हुआ है, जिससे सीमा पार से आतंकी गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है।
