पाकिस्तान में हिंदू किसान की हत्या पर भड़का विरोध, सड़कों पर उतरे हजारों लोग
सिंध प्रांत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का मामला
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ एक और गंभीर घटना सामने आई है। बदीन जिले में एक प्रभावशाली जमींदार ने जमीन विवाद के चलते एक युवा हिंदू किसान की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक का नाम कैलाश कोलही बताया गया है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया है और अल्पसंख्यक समुदाय में आक्रोश बढ़ गया है। आरोप है कि सरफराज निजामानी ने अपनी जमीन पर झोपड़ी बनाने को लेकर हुए मामूली विवाद में कैलाश की जान ले ली।
प्रदर्शन और सड़क जाम
लाश रखकर हाईवे जाम, बच्चे-बुजुर्ग सब सड़क पर
कैलाश की हत्या के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने बदीन-हैदराबाद राष्ट्रीय राजमार्ग और बदीन-थार कोयला सड़क पर शव रखकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। इस जाम के कारण सैकड़ों वाहन कई घंटों से फंसे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं, जो ठंड में खुले आसमान के नीचे इंसाफ की मांग कर रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
‘यह धरना नहीं, जख्मी जमीर की आवाज है’
सामाजिक कार्यकर्ता शिवा काच्छी ने सोशल मीडिया पर इस आंदोलन की तस्वीरें साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह धरना केवल भीड़ नहीं, बल्कि एक जख्मी जमीर की आवाज है। कैलाश कोलही का एकमात्र अपराध उसका गरीब होना था। उनके बच्चों के आंसू और विधवा की खामोश पीड़ा पाकिस्तान के सिस्टम से सवाल पूछ रही है कि क्या यहां गरीबों का खून इतना सस्ता है?
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
24 घंटे के आश्वासन के बाद भी पुलिस के हाथ खाली
यह घटना चार दिन पहले पीरू लशारी शहर के राहो कोलही गांव में हुई थी। हत्या के तुरंत बाद पीड़ित परिवार ने प्रदर्शन किया था, तब एसएसपी बदीन ने 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे लोगों का धैर्य टूट गया है। पुलिस की निष्क्रियता ने लोगों को फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर कर दिया है।
राजनीतिक और धार्मिक संगठनों का समर्थन
राजनीतिक और धार्मिक संगठनों का मिला साथ
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन को अब व्यापक समर्थन मिल रहा है। धरने में कई प्रमुख राजनीतिक, राष्ट्रवादी और धार्मिक संगठनों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हो गए हैं। यह घटना सिंध में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सामंती व्यवस्था की मनमानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
