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पिनाराई विजयन ने अमेरिका की वेनेजुएला में कार्रवाई की निंदा की

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। उन्होंने इसे अमेरिका की साम्राज्यवादी दादागिरी करार दिया और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस पर कड़ा विरोध नहीं कर रही है। विजयन ने कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं, जिससे भारत की विदेश नीति पर व्यापक चर्चा हो रही है।
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पिनाराई विजयन ने अमेरिका की वेनेजुएला में कार्रवाई की निंदा की

मुख्यमंत्री विजयन का बयान


केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को वैश्विक लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने इसे अमेरिका की 'साम्राज्यवादी दादागिरी' करार दिया और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के खिलाफ कड़ा विरोध नहीं कर रही है। विजयन ने कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, न कि संवेदनशील मुद्दों पर चुप रहना चाहिए।


अमेरिका की कार्रवाई पर सीएम का दृष्टिकोण

विजयन ने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि शक्तिशाली राष्ट्रों के लिए अन्य देशों की संप्रभुता का कोई महत्व नहीं है। यह बयान उन्होंने केरल विधानसभा के अंतरराष्ट्रीय पुस्तक महोत्सव के उद्घाटन समारोह में दिया। उन्होंने लोकतांत्रिक देशों से अपील की कि उन्हें ऐसे कदमों की निंदा करनी चाहिए।


साम्राज्यवाद का आरोप

विजयन ने इस घटना को 'अमेरिकी साम्राज्यवाद की दादागिरी' कहा और यह स्पष्ट किया कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के निर्णयों में बाहरी हस्तक्षेप का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए।


केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल

विजयन ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने वेनेजुएला पर अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ कोई ठोस विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि केंद्र को अमेरिका की नीतियों के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, न कि केवल संतुलन या संयम का संदेश देना चाहिए।


भारत का रुख और वैश्विक प्रतिक्रिया

भारत ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के संबंध में 'गहरी चिंता' व्यक्त की है और सभी पक्षों से संवाद और संयम बरतने का आग्रह किया है, लेकिन अमेरिका का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत एक संतुलित नीति अपनाने में लगा हुआ है।


राजनीतिक चर्चा और आलोचना

इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार को अमेरिका के खिलाफ अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए। वहीं विपक्ष का मानना है कि इस चुप्पी से देश की संप्रभुता पर सवाल उठता है। इस विवाद ने भारत की विदेश नीति और वैश्विक राजनीति में उसकी भूमिका पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।