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पीएम मोदी की कैबिनेट बैठक में केरल का नाम बदलने का निर्णय

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में कुल 12,236 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिसमें रेल और एयरपोर्ट परियोजनाएं शामिल हैं। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे का उद्देश्य और आगे की प्रक्रिया के बारे में।
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पीएम मोदी की कैबिनेट बैठक में केरल का नाम बदलने का निर्णय

कैबिनेट की पहली बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय


रेल, मेट्रो और एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए 12,236 करोड़ रुपये की मंजूरी


नई दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को सेवातीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। केंद्र ने केरल राज्य का नाम बदलकर 'केरलम' करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तीन रेल परियोजनाओं सहित कुल आठ महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।


कुल 12,236 करोड़ रुपये के विभिन्न परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। बैठक में पावर सेक्टर में सुधारों से संबंधित नीतिगत निर्णय भी लिए गए। कैबिनेट ने गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के डबलिंग, गम्हरिया-चांडिल और पुनारख-किऊल के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी मंजूरी दी। इसके अलावा, श्रीनगर में एक नया एयरपोर्ट टर्मिनल और अहमदाबाद मेट्रो के फेज 2बी का विस्तार भी किया जाएगा।


केरल विधानसभा की सहमति के बाद संसद में पेश होगा प्रस्ताव

कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद, राष्ट्रपति केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026 को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत केरल विधानसभा की राय के लिए भेजेंगे। विधानसभा से सहमति मिलने के बाद, सरकार इस बिल को संसद में पेश करेगी। यदि संसद से यह पास हो जाता है, तो राज्य का नाम आधिकारिक रूप से 'केरलम' हो जाएगा।


नाम परिवर्तन का उद्देश्य

केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को इस प्रस्ताव को पारित किया था। इस प्रस्ताव के अनुसार, केरल का असली नाम मलयाली भाषा में 'केरलम' है, जबकि हिंदी और अन्य भाषाओं में इसे 'केरल' कहा जाता है। नाम परिवर्तन का मुख्य उद्देश्य केरल राज्य की पहचान, भाषा, संस्कृति और विकास को बढ़ावा देना है।