पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में राजनीतिक नेताओं को लिखा पत्र
प्रधानमंत्री का पत्र और नारी शक्ति वंदन अधिनियम
नई दिल्ली - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में लोकसभा और राज्यसभा के सभी दलों के नेताओं को पत्र भेजा है। उन्होंने सभी से इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट होने की अपील की है और सांसदों से आग्रह किया है कि वे इस विषय पर अपने विचार संसद में रखें। यह एक ऐसा अवसर है जो किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है।
अपने पत्र में, पीएम मोदी ने उल्लेख किया, "16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है। यह बैठक हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने का एक अवसर है और सभी की एकजुटता को दर्शाने का मौका है।" उन्होंने कहा कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब महिलाओं को निर्णय लेने और नेतृत्व करने का अवसर मिलता है। भारत की बेटियां विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं, जैसे कि स्पेस, खेल, और स्टार्ट-अप्स।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण पर चर्चा दशकों से चल रही है। उन्होंने पत्र में लिखा, "2023 में सभी दलों के सांसदों ने एक साथ आकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था। यह एक अविस्मरणीय अवसर था, जिसने हमारी एकजुटता को दर्शाया।" उन्होंने यह भी बताया कि नारी शक्ति हमारे समाज का लगभग आधा हिस्सा है और इस कदम से उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
पत्र में, पीएम मोदी ने कहा कि अब समय आ गया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी भावना के साथ लागू किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि 2029 का लोकसभा चुनाव और सभी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण लागू होने के बाद हों। इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा आएगी और शासन व्यवस्था में सभी की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट हों। पीएम मोदी ने कहा, "यह नारी शक्ति और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी है। यह सही समय है कि हम राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाएं।" उन्होंने विश्वास जताया कि हम एकजुट होकर संसद में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करेंगे।
अंत में, पीएम मोदी ने कहा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने वाले संसद के सदस्य इस महान कार्य में योगदान देने पर गर्व महसूस करेंगे। इसलिए हमें इस अवसर को नहीं छोड़ना चाहिए।" उन्होंने सभी से अपील की कि वे लोकतंत्र की महान परंपराओं को जीवंत बनाएं और इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए कदम उठाएं।
