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पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं। पीएम ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के बारे में भी जानकारी दी, जो महिलाओं के लिए संसद में आरक्षण सुनिश्चित करेंगे। जानें इस सम्मेलन में और क्या कहा गया।
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पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम


पीएम मोदी ने नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला
दिल्ली के विज्ञान भवन में सोमवार को आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि देश की संसद एक नए युग की शुरुआत के करीब है।


उन्होंने बताया कि 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जो दशकों की प्रतीक्षा का अंत करेगा। पीएम ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा और संसद में उनकी भागीदारी को आसान बनाएगा।


उन्होंने यह भी कहा कि हमारी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्होंने कहा, "मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन मैं सब कुछ जानता हूं।"


महिलाओं के लिए सरकार की योजनाएं

पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जैसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृत्व योजना, और सुकन्या समृद्धि योजना। उन्होंने मिशन इंद्र धनुष का भी उल्लेख किया, जो टीकाकरण को सुनिश्चित करता है।


स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्कूलों में शौचालयों की सुविधा, मुफ्त सैनिटरी पैड, और खेलों में सालाना 1 लाख रुपये की सहायता भी प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, उज्जवला योजना के तहत रसोई में धुएं से बचाने के उपाय किए गए हैं।


आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज भी उपलब्ध है, जिसका सबसे अधिक लाभ महिलाओं को मिल रहा है।


नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की योजना

सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में दो महत्वपूर्ण संशोधनों की योजना बनाई है, जिसमें एक अलग परिसीमन विधेयक भी शामिल है। महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए इन विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक है।


हालांकि, मौजूदा स्थिति को बनाए रखते हुए ओबीसी आरक्षण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि एससी/एसटी आरक्षण पहले की तरह जारी रहेगा।