पुलिस स्टेशनों की जर्जर स्थिति: सुधार की आवश्यकता
पुलिस स्टेशनों में जब्त वाहनों की समस्या
देशभर के पुलिस थानों में हजारों जब्त कारें, बाइकें और अन्य वाहन सड़ रहे हैं। ये वाहन अक्सर थानों के पास की सड़कों पर खड़े रहते हैं, जिससे यातायात में बाधा आती है। ईंधन का रिसाव, जंग और बरसाती पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। आग लगने का जोखिम भी हमेशा बना रहता है।
पुलिस की बुनियादी जरूरतें
हम अक्सर फिल्मों और वेब सीरीज में देखते हैं कि कैसे पुलिस को बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण कोर्ट और मीडिया का सामना करना पड़ता है। यह समझना जरूरी है कि पुलिस भी इंसान हैं। यदि हम उनसे कानून व्यवस्था बनाए रखने की उम्मीद करते हैं, तो क्या सरकार की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए कि पुलिस थानों में बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखा जाए?
डिजिटल इंडिया का नारा और वास्तविकता
जब सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘मॉडर्न पोलिसिंग’ का नारा देती है, तब भी अधिकांश पुलिस स्टेशन पुराने औपनिवेशिक ढांचे में कैद हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी और जर्जर इन्फ्रास्ट्रक्चर न केवल पुलिस के काम को बाधित कर रहा है, बल्कि आम जनता के लिए भी ये थाने डर का प्रतीक बन गए हैं।
पुलिस स्टेशनों की स्थिति
जनवरी 2023 के केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 17,849 पुलिस स्टेशन हैं। इनमें से 58 में वाहन नहीं हैं, 680 में लैंडलाइन फोन नहीं हैं और 282 में मोबाइल फोन तक नहीं हैं। कई स्टेशनों में बिजली, इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी है।
सुधार की दिशा में कदम
सुधार के लिए सबसे पहले बीपीआरडी के मॉडल पुलिस स्टेशन मानकों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। हर स्टेशन में डिजिटल रिकॉर्ड रूम, सीसीटीवी, पर्याप्त शौचालय और प्रतीक्षा कक्ष अनिवार्य होने चाहिए। इसके अलावा, जब्त वाहनों के लिए अलग डिस्पोजल यार्ड और ऑनलाइन नीलामी की व्यवस्था होनी चाहिए।
पुलिस सुधार की आवश्यकता
पुलिस सुधार समितियों ने इन मुद्दों पर बार-बार आवाज उठाई है। 1977-81 की नेशनल पुलिस कमीशन ने बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण पर जोर दिया। लेकिन अधिकांश राज्य इन सुधारों को लागू करने में असफल रहे हैं। आज की आवश्यकता है कि हम पुलिस को सेवा प्रदाता मानें, न कि केवल अपराध नियंत्रक।
