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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि पर RBI गवर्नर की चेतावनी

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईंधन की बचत करने की अपील की है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि पर RBI गवर्नर की चेतावनी

भारतीय अर्थव्यवस्था पर पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।


सरकार और तेल कंपनियों की भूमिका

स्विट्जरलैंड में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान, गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियां कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का बोझ अपने ऊपर ले रही हैं, ताकि आम जनता पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में राहत दी है और तेल कंपनियां भी नुकसान सहन कर कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रही हैं। लेकिन, यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहा, तो ईंधन की कीमतों में वृद्धि करना अनिवार्य हो सकता है।


प्रधानमंत्री की अपील

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने की अपील की है। उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल का सीमित उपयोग करने और सोने की खरीद को टालने की सलाह दी है, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रह सके। सरकार ने सोने पर आयात शुल्क भी बढ़ा दिया है और आने वाले समय में और कदम उठाए जा सकते हैं।


महंगाई की स्थिति

महंगाई के मोर्चे पर भी दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 3.48 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि मार्च में यह 3.40 प्रतिशत थी। हालांकि यह आंकड़ा अपेक्षा से कम रहा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जारी रही, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।


वैश्विक सप्लाई चेन पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर भी असर पड़ने लगा है। तेल की आपूर्ति और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से भारतीय बाजारों में भी प्रभाव देखने को मिल सकता है। RBI ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि औसत महंगाई 4.6 प्रतिशत रहने की संभावना है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है।


RBI की मौद्रिक नीति

गौरतलब है कि RBI ने अप्रैल में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक लगातार आर्थिक हालात पर नजर रखे हुए है और आवश्यकता पड़ने पर महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।