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प्रधानमंत्री की नीतियों पर सवाल: आर्थिक संकट का बोझ नागरिकों पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार की नीतियों से उत्पन्न आर्थिक संकट का बोझ नागरिकों पर डालने का प्रयास किया है। हाल ही में केंद्र सरकार ने सोने और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाया है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। जानें कैसे सरकार की नीतियों ने आम नागरिकों को प्रभावित किया है और धनी वर्ग के लिए राहत प्रदान की है। क्या यह स्थिति सुधारने का सही तरीका है? पढ़ें पूरी जानकारी के लिए।
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प्रधानमंत्री की नीतियों पर सवाल: आर्थिक संकट का बोझ नागरिकों पर

आर्थिक संकट और सरकार की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार द्वारा उत्पन्न समस्याओं का समाधान नागरिकों पर डालने का प्रयास किया है। लेकिन इससे स्थिति में सुधार नहीं होगा। बेहतर होगा कि वे अपनी नीतियों को धनी वर्ग पर केंद्रित करें।


आर्थिक संकट के बीच, प्रधानमंत्री के भाषणों ने देश में चिंता का माहौल पैदा किया है। इस स्थिति में, केंद्र सरकार ने सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत (10 प्रतिशत कस्टम + 5 प्रतिशत कृषि एवं विकास उपकर) कर दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि सोने का आयात विदेशी मुद्रा भंडार में कमी का एक बड़ा कारण रहा है। लेकिन यदि हम इसके कारणों की जांच करें, तो यह स्पष्ट है कि आयात में वृद्धि की जिम्मेदारी नरेंद्र मोदी सरकार पर है।


केंद्र ने मई 2022 में यूएई के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लागू किया, जिसके तहत वहां से स्वर्ण आयात पर शुल्क सामान्य छह प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत (यानी पांच प्रतिशत) कर दिया गया। 2022 में भारत के कुल सोने के आयात में यूएई का हिस्सा 7.9 प्रतिशत (2.9 बिलियन डॉलर) था, जो पिछले वर्ष बढ़कर 28 प्रतिशत (16.5 बिलियन डॉलर) हो गया। इस दौरान सोने की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई, जिससे यह आम मध्य वर्ग की पहुंच से बाहर हो गया। जबकि धनी वर्ग ने खरीदारी जारी रखी, जिससे डॉलर का बाहर जाना बढ़ा। प्रधानमंत्री ने मध्य वर्ग से विदेश यात्रा से बचने की अपील की है, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में विदेश जाने वाले भारतीयों की संख्या में कमी आई है।


हालांकि, डॉलर का बाहर जाना बढ़ा है, जिसका कारण धनी व्यक्तियों का विदेश में संपत्ति में निवेश करना है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच, इन लोगों ने विदेश में 26.4 बिलियन डॉलर का निवेश किया। यह संभव हुआ क्योंकि मोदी सरकार ने लिबरलाइज्ड रेमिटैंस स्कीम, टैक्स राहत, और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जैसे उपायों के माध्यम से विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया। ये मुद्दे इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की नीतियों से उत्पन्न समस्याओं का समाधान नागरिकों पर डालने का प्रयास किया है। लेकिन इससे स्थिति में सुधार नहीं होगा। सरकार को संकट के समय में प्रशासनिक उपाय करने चाहिए और ध्यान धनी वर्ग पर केंद्रित करना चाहिए।