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प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा: एससीओ समिट में भागीदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में पहुंचकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में भाग लेने की तैयारी की है। इस यात्रा के दौरान, वे कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होंगे, जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात शामिल है। मोदी ने अपनी यात्रा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने में सहायक होगी। एससीओ के सदस्य देशों और संवाद साझेदारों की जानकारी भी इस समिट में महत्वपूर्ण होगी।
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प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा: एससीओ समिट में भागीदारी

प्रधानमंत्री मोदी का तियानजिन आगमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को चीन के तियानजिन पहुंचे, जहां वे रविवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।


इससे पहले, उन्होंने जापान की यात्रा पूरी की और फिर तियानजिन के बिनहाई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया।


एससीओ समिट में चर्चा का इंतजार

चीन पहुंचने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैं तियानजिन में उतर चुका हूं। एससीओ समिट के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं के साथ गहन चर्चा करने का इंतजार है।"


महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें

समिट के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे, जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से रविवार और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सोमवार को मिलने की संभावना है।


उनकी पिछली मुलाकात 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान हुई थी, जहां भारत और चीन के बीच सीमा पर पेट्रोलिंग को लेकर एक समझौता हुआ था।


भारत की एससीओ में भूमिका

भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है और 2022-23 के दौरान इस संगठन की अध्यक्षता भी कर चुका है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है। हमारी अध्यक्षता के दौरान, हमने नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में नए विचार प्रस्तुत किए हैं।"


एससीओ का महत्व

उन्होंने आगे कहा, "मुझे विश्वास है कि जापान और चीन की मेरी यात्राएं हमारे राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने में सहायक होंगी और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास में सहयोग को बढ़ावा देंगी।"


एससीओ एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में हुई थी। इसके सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, पाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं।


एससीओ के पर्यवेक्षक और संवाद साझेदार

एससीओ के दो पर्यवेक्षक अफगानिस्तान और मंगोलिया हैं, जबकि इसके 14 संवाद साझेदार देशों में तुर्की, कुवैत, अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया और नेपाल शामिल हैं।


इसके अलावा, श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार और संयुक्त अरब अमीरात भी एससीओ के संवाद साझेदार हैं।