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प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा: त्येनजिन में शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में चीन के त्येनजिन शहर का दौरा किया, जहाँ वे शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इस यात्रा के दौरान, उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक भी होगी। त्येनजिन का ऐतिहासिक और औद्योगिक महत्व इसे एक प्रमुख केंद्र बनाता है। जानें इस शहर की विशेषताएँ और यहाँ की अर्थव्यवस्था के बारे में।
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त्येनजिन का महत्व और प्रधानमंत्री की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में चीन के त्येनजिन शहर पहुंचे हैं, जहाँ वे शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस यात्रा के दौरान, रविवार को उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक भी निर्धारित है। यह मुलाकात अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी शुल्कों के बाद हो रही है, जिससे इसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


त्येनजिन शहर का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी उल्लेखनीय है। यह शहर उत्तर पूर्वी चीन के मैदान के किनारे स्थित है और हेबेई प्रांत के पूर्वी हिस्से में आता है। शंघाई और बीजिंग के बाद, यह चीन की तीसरी सबसे बड़ी नगरपालिका है। यहाँ का औद्योगिक केंद्र और महत्वपूर्ण बंदरगाह होने के साथ-साथ, इसका इतिहास भी समृद्ध है। युआन राजवंश के समय से यह व्यापार और परिवहन का केंद्र रहा है।


त्येनजिन की जलवायु महाद्वीपीय है, जिसमें दिनभर और मौसम के अनुसार तापमान में बदलाव होता है। यहाँ का औसत वार्षिक तापमान लगभग 13 डिग्री सेल्सियस है। समुद्र तटीय क्षेत्रों में यहाँ की वनस्पतियाँ जैसे रूसी थीस्ल और आर्टेमिसिया पाई जाती हैं।


शहर की जनसंख्या मुख्यतः केंद्र में रहती है, जहाँ आवासीय घनत्व अधिक है। 1949 से पहले यहाँ के अधिकांश लोग व्यापार या सेवा क्षेत्रों में कार्यरत थे, लेकिन अब यहाँ की अर्थव्यवस्था उद्योग पर आधारित है। लगभग आधे लोग भारी उद्योग, लोहा-इस्पात और मशीनरी उत्पादन में लगे हुए हैं।


त्येनजिन में औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ, 1980 के दशक से जब चीन ने आर्थिक सुधारों को अपनाया, तब से यहाँ कई अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों ने निवेश किया है, जिससे यहाँ की आर्थिक स्थिति और भी मजबूत हुई है।