प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा: चीन में SCO सम्मेलन में भागीदारी

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का समापन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा जापान की समाप्त की और अब वे चीन के तियानजिन के लिए रवाना हो गए हैं। वहां वे 31 अगस्त और 1 सितंबर को आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। यह सम्मेलन भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर जब भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है।
जापान यात्रा की उपलब्धियाँ
जापान यात्रा को ऐतिहासिक बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जापान यात्रा के समापन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने इसे अत्यंत सफल करार दिया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के परिणाम दोनों देशों के नागरिकों के लिए दीर्घकालिक लाभकारी होंगे। पीएम मोदी ने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा और जापानी जनता का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए आभार व्यक्त किया।
भारत-जापान के बीच नए समझौते
साझेदारी के नए आयाम
इस यात्रा के दौरान भारत और जापान ने 13 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई। दोनों देशों ने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने का निर्णय लिया। सबसे महत्वपूर्ण घोषणा जापान द्वारा भारत में अगले दशक में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 60,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने की थी। समझौतों में रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए 10 वर्षीय रोडमैप शामिल है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना है।
आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान
आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग
भारत और जापान ने एक व्यापक आर्थिक सुरक्षा ढांचे की स्थापना की है, जिसका उद्देश्य अर्धचालक, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, महत्वपूर्ण खनिज और नई उभरती प्रौद्योगिकियों में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इशिबा ने उन्नत तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। दोनों देशों का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
चीन की यात्रा का महत्व
सात साल बाद चीन की यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी अब चीन के तियानजिन में होने वाले SCO सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो गए हैं। यह उनकी सात वर्षों में पहली यात्रा है। सम्मेलन में सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है, खासकर हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के निर्णय के बाद, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ है। ऐसे में भारत-चीन संवाद को वैश्विक मंच पर संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।