प्रधानमंत्री मोदी को मिला दारुमा डॉल, जापान यात्रा का सांस्कृतिक महत्व

प्रधानमंत्री मोदी को दारुमा डॉल का उपहार
प्रधानमंत्री मोदी को दारुमा डॉल का उपहार: शुक्रवार को जापान यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के पुजारी द्वारा दारुमा डॉल भेंट की गई। यह डॉल जापान की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है और इसे एक लोकप्रिय स्मृति चिह्न माना जाता है। इसे बोधिधर्म के आधार पर बनाया गया है, जो जेन बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। यह धैर्य, दृढ़ संकल्प और सौभाग्य का प्रतीक है।
पीएम मोदी शुक्रवार की सुबह टोक्यो पहुंचे। यह दो दिवसीय यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ नीतियों को लेकर तनाव बढ़ रहा है। टोक्यो में एक बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान मिलकर एशियाई सदी का निर्माण करेंगे, जो स्थिरता, विकास और समृद्धि लाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जापान की उत्कृष्टता और भारत का पैमाना मिलकर एक आदर्श साझेदारी बना सकते हैं।
VIDEO | Tokyo: PM Narendra Modi (@narendramodi) is presented with a Daruma doll by the priest at Shorinzan Daruma-ji Temple.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 29, 2025
The Daruma doll is a traditional Japanese talisman symbolizing perseverance and good luck, often used to set and achieve personal or professional goals.… pic.twitter.com/zfjlPtnAdu
दारुमा डॉल का महत्व
दारुमा डॉल का महत्व: दारुमा जापान का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक है। इसे सौभाग्य और संघर्ष में डटे रहने का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक रूप से, इसका उपयोग लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए किया जाता है। जब कोई व्यक्ति लक्ष्य तय करता है, तो डॉल की एक आंख को रंगा जाता है और जब वह लक्ष्य पूरा हो जाता है, तो दूसरी आंख भरी जाती है। इसकी गोल आकृति इसे बार-बार गिरने पर भी सीधा खड़ा होने में मदद करती है, जो दृढ़ता का प्रतीक है और कहावत 'सात बार गिरो, आठ बार उठो' को दर्शाता है।
दारुमा और भारत का संबंध
दारुमा और भारत का संबंध: दारुमा डॉल का संबंध भारत से भी जुड़ा हुआ है। इसे बोधिधर्म से प्रेरित होकर बनाया गया है, जो भारत के कांचीपुरम के एक भिक्षु थे और जापान में दारुमा दैशी के नाम से पूजनीय हैं। परंपरा के अनुसार, बोधिधर्म ने नौ वर्षों तक लगातार दीवार की ओर मुख करके ध्यान किया था। इसी वजह से दारुमा डॉल बिना हाथ-पैर और आंखों के बनाए जाते हैं, जो उनकी तपस्या और त्याग की याद दिलाते हैं।
सांस्कृतिक प्रतीक का भेंट
सांस्कृतिक प्रतीक का भेंट: प्रधानमंत्री मोदी को जापान के इस सांस्कृतिक प्रतीक का भेंट मिलना भारत और जापान की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कड़ी को भी दर्शाता है। दोनों देशों के बीच यह रिश्ता न केवल व्यापार और विकास तक सीमित है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं में भी गहराई से जुड़ा हुआ है।