प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन किया
भारत की सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में केन्स सेमीकॉन के अत्याधुनिक प्लांट का उद्घाटन किया, जो भारत को सेमीकंडक्टर तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने के मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्लांट की लागत 3300 करोड़ रुपये है और यह चिप्स की असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग के आधुनिक मानकों पर आधारित है। यहां IPM मॉड्यूल का उत्पादन भी शुरू हो चुका है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों और औद्योगिक मशीनों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोग किया जाएगा। यह प्लांट भारत की तकनीकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
सेमीकंडक्टर मिशन को नई दिशा
साणंद में स्थापित यह प्लांट भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह यूनिट भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन का एक विश्वसनीय निर्माता बनाएगी। सरकार का उद्देश्य चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग को घरेलू स्तर पर बढ़ावा देना है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा भारत की तकनीकी क्षमताओं को आने वाले वर्षों में मजबूत करेगी।
OSAT यूनिट और IPM उत्पादन की शुरुआत
यह प्लांट OSAT, यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट सुविधा है। यहां चिप्स का निर्माण नहीं किया जाता, बल्कि उनकी असेंबली और टेस्टिंग की जाती है। फैक्ट्री में IPM मॉड्यूल का पहला उत्पादन शुरू हो चुका है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्ट औद्योगिक मशीनों और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के लिए आवश्यक होते हैं। इनका घरेलू स्तर पर निर्माण शुरू होने से भारत के EV और औद्योगिक क्षेत्र को सीधा लाभ होगा।
निर्यात के नए अवसर और वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका
उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि यह प्लांट केवल भारत की जरूरतों को पूरा नहीं करेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' अभियान के तहत बने IPMs और अन्य सेमीकंडक्टर पैकेज यूनिट्स का निर्यात भी किया जाएगा। इससे भारत तकनीकी निर्माण के क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा और देश में विदेशी निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
भारत की दूसरी ऑपरेशनल सेमीकंडक्टर यूनिट
यह यूनिट भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत शुरू की गई दूसरी ऑपरेशनल सुविधा है। इससे पहले माइक्रोन ने भी अपनी OSAT यूनिट भारत में स्थापित की थी। साणंद प्लांट भविष्य में रोजाना 63 लाख यूनिट तक उत्पादन करने की क्षमता रखता है। इस स्तर का उत्पादन न केवल आयात को कम करेगा, बल्कि रोजगार, उद्योग वृद्धि और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट भारत को ग्लोबल चिप हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
